बुधवार, 19 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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बिहार: मिड-डे मील में नमक की जगह मिलाया डिटर्जेंट, 24 से ज्यादा स्कूली बच्चे अस्पताल में भर्ती

बिहार के एक स्कूल में मंगलवार को मिड-डे मील खाने के बाद दो दर्जन से ज्यादा बच्चों की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना…

बिहार: मिड-डे मील में नमक की जगह मिलाया डिटर्जेंट, 24 से ज्यादा स्कूली बच्चे अस्पताल में भर्ती
(फोटो: IANS)

बिहार के एक स्कूल में मंगलवार को मिड-डे मील खाने के बाद दो दर्जन से ज्यादा बच्चों की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना नूरसराय थाना क्षेत्र के पारसी मिडिल स्कूल में हुई, जहाँ खाने में गलती से नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर मिला दिया गया था।

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स्कूल के प्रिंसिपल शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों को चावल और सोयाबीन की सब्जी परोसी गई थी। जब कुछ बच्चों ने खाने में नमक कम होने की शिकायत की, तो रसोइए ने गलती से नमक के डिब्बे की जगह डिटर्जेंट पाउडर का डिब्बा उठा लिया और उसे खाने में मिला दिया। बताया जा रहा है कि दोनों डिब्बे रसोई में एक ही जगह रखे हुए थे।

कैसे बिगड़ी बच्चों की तबीयत?

खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को उल्टी और चक्कर आने की शिकायत होने लगी, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्कूल में ही बच्चों को प्राथमिक उपचार देने की कोशिश की गई, लेकिन जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ, तो सभी को बिहार शरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया।

सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों का हाल जाना और बताया कि सभी बच्चे अब खतरे से बाहर हैं। हालांकि, इस घटना के बाद अस्पताल में बच्चों के परिजन जमा हो गए और उन्होंने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए हंगामा किया। परिजनों का आरोप था कि एक ही बिस्तर पर दो से तीन बच्चियों का इलाज किया जा रहा था। बाद में सिविल सर्जन के बेहतर इलाज का आश्वासन देने पर मामला शांत हुआ।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने आरोप लगाया कि स्कूल से सूचना दिए जाने के बावजूद नूरसराय अस्पताल से न तो कोई एम्बुलेंस भेजी गई और न ही कोई मेडिकल टीम मौके पर पहुंची।

एम्बुलेंस न मिलने के कारण मजबूरन परिजनों को अपने बच्चों को ई-रिक्शा और टेम्पो से सदर अस्पताल ले जाना पड़ा। उनका कहना था कि अगर समय पर मेडिकल मदद मिलती, तो बच्चों को तुरंत राहत मिल सकती थी। इस घटना के बाद अब राज्य में मिड-डे मील योजना की निगरानी और स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की आपातकालीन प्रतिक्रिया दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social बिहार डेस्क

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