शेयर ट्रेडिंग का झांसा देकर लाखों की ठगी, पुलिस ने ओडिशा से एक आरोपी को किया गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है जो शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों को अपना निशाना बनाता था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस मामले में…
दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है जो शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों को अपना निशाना बनाता था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस मामले में शाहदरा साइबर थाने की पुलिस ने ओडिशा के भुवनेश्वर से एक 33 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो ठगी के पैसे को अलग-अलग बैंक खातों में ठिकाने लगाने का काम करता था।
यह कार्रवाई रामचंद्र यादव नाम के एक व्यक्ति की शिकायत पर शुरू हुई, जिनसे कुल 4.75 लाख रुपये की ठगी हुई थी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां जालसाज खुद को निवेश सलाहकार बताकर लोगों को लुभाते थे। भरोसा जीतने के लिए उन्होंने एक नकली ऐप पर शुरुआती निवेश पर मोटा मुनाफा भी दिखाया।
जब यादव ने अपनी बड़ी रकम और मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो उनसे टैक्स और अन्य शुल्क के नाम पर 12 लाख रुपये की और मांग की गई। इसके बाद उन्हें धोखाधड़ी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
पुलिस ने मामले की जांच के लिए इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया। टीम ने पैसों के लेन-देन की कड़ियां जोड़ते हुए पाया कि ठगी की रकम का एक बड़ा हिस्सा (3.75 लाख रुपये) भुवनेश्वर स्थित 'फ्यूजन एंटरप्राइजेज' नाम के एक कॉर्पोरेट खाते में भेजा गया था। यह खाता सुब्रत कुमार साहू और संतोष कुमार लेंका के नाम पर था।
तकनीकी जांच और निगरानी के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी सुब्रत कुमार साहू को भुवनेश्वर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह अवैध वित्तीय लेन-देन के लिए करीब सात कॉर्पोरेट और बचत बैंक खाते चला रहा था।
एक खाते में 2 महीने में आए 3 करोड़
जांच में यह भी पता चला कि साहू के सिर्फ एक बैंक खाते में महज दो महीने के भीतर करीब 2.97 करोड़ रुपये जमा हुए थे। पुलिस के मुताबिक, यह खाता देशभर में दर्ज 17 अलग-अलग साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़ा हुआ है। आरोपी के मोबाइल फोन से सह-आरोपियों के साथ वित्तीय लेन-देन से जुड़ी बातचीत भी मिली है। पुलिस अब गिरोह के बाकी सदस्यों और पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
कैसे काम करता था यह गिरोह?
पुलिस ने बताया कि ये ठग व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ग्रुप बनाकर लोगों को निशाना बनाते थे। वे पहले छोटी रकम निवेश कराकर नकली ऐप पर मुनाफा दिखाते थे, और कभी-कभी भरोसा जीतने के लिए थोड़ी रकम निकालने भी देते थे। जब पीड़ित को पूरा यकीन हो जाता, तो वे उसे बड़ी रकम लगाने के लिए उकसाते थे। पैसा निकालने के वक्त विभिन्न शुल्कों के बहाने और पैसे मांगे जाते और फिर आरोपी संपर्क तोड़ देते थे। पुलिस ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किया है।
इनपुट: IANS



