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भारत का 'परमाणु मिशन 2047': 100 गीगावाट क्षमता के लक्ष्य के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की बड़ी छलांग

भारत ने 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट (GW) तक पहुँचाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, ताकि देश की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को स्वच्छ और भरोसेमंद स्रोतों से पूरा किया जा सके…

भारत का 'परमाणु मिशन 2047': 100 गीगावाट क्षमता के लक्ष्य के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की बड़ी छलांग
(फोटो: IANS)

भारत ने 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट (GW) तक पहुँचाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, ताकि देश की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों को स्वच्छ और भरोसेमंद स्रोतों से पूरा किया जा सके। सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक, इस दिशा में काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और वर्तमान में 9 नए परमाणु रिएक्टरों का निर्माण चल रहा है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, इन नए रिएक्टरों के पूरा होने पर देश की मौजूदा क्षमता में 7.5 गीगावाट की वृद्धि होगी।

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फिलहाल, देश में कुल 24 परमाणु ऊर्जा रिएक्टर काम कर रहे हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8.78 गीगावाट है। सरकार का यह कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

निर्माण और विस्तार की नई योजनाएँ

लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। हाल ही में, स्वदेशी तकनीक पर आधारित 10 प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR) को एक साथ 'फ्लीट मोड' में बनाने की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, 500 मेगावाट क्षमता वाले दो फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों (FBR) के लिए भी शुरुआती गतिविधियों को स्वीकृति मिल गई है। ये पहलें 'परमाणु ऊर्जा मिशन (2025-26)' और 'शांति अधिनियम, 2025' जैसे नीतिगत उपायों के तहत की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना है।

थोरियम आधारित भविष्य और तकनीकी आत्मनिर्भरता

भारत का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से तकनीकी आत्मनिर्भरता पर केंद्रित रहा है। यह रणनीति तब विकसित हुई जब देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन और तकनीक संबंधी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था। इसी अनुभव से सीखते हुए भारत ने अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करने के लिए एक अनूठा तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम बनाया है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य धीरे-धीरे यूरेनियम आधारित ईंधन से थोरियम आधारित ईंधन चक्र की ओर बढ़ना है। थोरियम को भविष्य का स्वच्छ ऊर्जा स्रोत माना जाता है और भारत इसके सबसे बड़े भंडारों में से एक है।

सुरक्षित कचरा प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा

परमाणु ऊर्जा के साथ-साथ सरकार कचरे के सुरक्षित प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके पास उच्च-स्तरीय रेडियोधर्मी कचरे को कांच जैसी स्थिर संरचना में बदलने (विट्रिफिकेशन) की तकनीक है। यह प्रक्रिया कचरे के भंडारण और निपटान को बेहद सुरक्षित बनाती है। सरकार का मानना है कि परमाणु ऊर्जा देश को 24 घंटे विश्वसनीय बिजली प्रदान कर सकती है, जो सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों की पूरक बनकर ग्रिड को स्थिरता देगी और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद करेगी।

इनपुट: IANS

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