मणिपुर: 6 नागा नागरिकों की हत्या मामले में एक दंपति गिरफ्तार, NIA और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
मणिपुर में छह नागा नागरिकों के अपहरण और निर्मम हत्या के सनसनीखेज मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), CRPF और मणिपुर पुलिस की एक संयुक्त टी
मणिपुर में छह नागा नागरिकों के अपहरण और निर्मम हत्या के सनसनीखेज मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), CRPF और मणिपुर पुलिस की एक संयुक्त टीम ने शुक्रवार को एक पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है। दोनों पर इस वारदात में शामिल होने का आरोप है।
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान प्रदीप और उनकी पत्नी अयिंगबी के रूप में हुई है, जो कांगपोकपी जिले के लेइलोन वैफेई गांव के निवासी हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि खुफिया जानकारी के आधार पर शुक्रवार तड़के इसी गांव में एक संयुक्त अभियान चलाकर दोनों को पकड़ा गया। सुरक्षाबलों ने उनके घर और आसपास के इलाकों में तलाशी लेकर मामले से जुड़े जरूरी सबूत भी जुटाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के मुताबिक, 13 मई को छह नागा नागरिकों का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया था। इसके लगभग एक महीने बाद, 11 जून को कांगपोकपी जिले के एक जंगल से उनके शव बरामद हुए थे। इस घटना ने पूरे मणिपुर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया और नागा तथा कुकी-जो समुदायों के बीच तनाव को फिर से बढ़ा दिया। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह पहले ही इस मामले की जांच NIA को सौंपने की घोषणा कर चुके थे।
घटना के बाद का घटनाक्रम
इस हत्याकांड पर खेद जताते हुए कुकी-जो काउंसिल (KZC) ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। परिषद के अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने स्वीकार किया था कि कुकी-जो समुदाय के कुछ लोगों ने "भावनाओं में आकर" यह "गंभीर गलती" की थी। हालांकि, ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर समेत कई नागा संगठनों ने इस माफी को "ईमानदार नहीं" बताते हुए खारिज कर दिया और सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी।
गौरतलब है कि 13 मई की हिंसा के बाद उग्रवादी समूहों ने कांगपोकपी और सेनापति जिलों में दोनों समुदायों के करीब 50 लोगों को बंधक बना लिया था। इसी हिंसा में तीन चर्च नेताओं की भी हत्या कर दी गई थी। प्रशासन और सामुदायिक नेताओं के प्रयासों से 14 और 15 मई को लगभग 30 बंधकों को रिहा कराया गया। बाद में 10 जून को शेष 14 कुकी ग्रामीणों को भी रिहा कर दिया गया। इसके अगले ही दिन, 11 जून को छह नागा बंधकों के शव मिले थे।
इनपुट: IANS



