नेपाल को भारत से बड़ी उम्मीदें, प्रधानमंत्री बालेन शाह के दौरे से पहले बड़े सहायता पैकेज के संकेत
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण की भारी चुनौती के बीच, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर काठमांडू को नई दिल्ली से एक 'बड़े सहायता पैकेज' की…
नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण की भारी चुनौती के बीच, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर काठमांडू को नई दिल्ली से एक 'बड़े सहायता पैकेज' की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह यात्रा नवंबर के आखिरी दिनों में हो सकती है, जिसके दौरान नेपाल आर्थिक मदद के अलावा सीमा विवाद और व्यापार जैसे मुद्दों पर भी ठोस प्रगति चाहता है।
हालांकि दोनों देशों ने अभी तक इस यात्रा की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से कहा जा रहा है कि पीएम शाह 22 या 23 नवंबर को नई दिल्ली का दौरा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री की प्रेस सलाहकार दीपा दहल ने IANS को बताया, "नवंबर के आखिरी दिनों में पीएम शाह के भारत दौरे की संभावना है। वह भारत में कितने दिन रहेंगे, यह अभी तय नहीं हुआ है।"
पुनर्निर्माण और आर्थिक सहायता
इस साल अगस्त में आई बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' के मुताबिक, भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों में आई बाढ़ में करीब 1,500 लोगों की जान चली गई और 5,000 से ज्यादा अब भी लापता हैं। इस आपदा ने बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत संयंत्रों को बहा दिया, जिससे अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है।
विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि हालांकि पुनर्निर्माण के लिए विशाल संसाधनों की आवश्यकता है, लेकिन बड़े सहायता पैकेज की मांग बाढ़ से पहले भी की जा रही थी। नेपाल ऐसी सहायता चाहता है जिसमें शर्तें कम हों ताकि काम तेजी से और आसानी से हो सके। भारत वर्तमान में नेपाल को नियमित अनुदान के अलावा 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (LOC) के जरिए भी मदद करता है, जिसकी कुल राशि 1.65 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।
व्यापार, पारगमन और हवाई मार्ग
आर्थिक सहायता के अलावा नेपाल की कई अन्य अपेक्षाएं भी हैं। वह लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों, विशेषकर लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा के मुद्दे को सुलझाना चाहता है। साथ ही, वह भारतीय हवाई क्षेत्र से अतिरिक्त 'एयर-एंट्री रूट' की भी मांग कर रहा है। वर्तमान में, लगभग 90% अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सिमारा के एक ही व्यस्त मार्ग से होकर आती हैं। नेपाल ने जनकपुर, भैरहवा और नेपालगंज के जरिए तीन नए प्रवेश बिंदुओं का प्रस्ताव दिया है, जो पोखरा और भैरहवा के नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इसके अतिरिक्त, नेपाल चाहता है कि 2023 में स्वतः नवीनीकृत हुई 'नेपाल-भारत व्यापार संधि' की जल्द समीक्षा हो। नेपाली निर्यातक 'ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स' (बीआईएस) से प्रमाण-पत्र लेने की शर्त जैसी गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने की भी मांग कर रहे हैं।
विकास परियोजनाओं का उद्घाटन
संभावना है कि इस दौरे के दौरान दोनों प्रधानमंत्री भारत की मदद से बनी कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे। इनमें पनौती में 'नेपाल पुलिस अकादमी', दार्चुला में एक पुल, भैरहवा में 'इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट' और महाकाली नदी पर बना एक मोटर-योग्य पुल शामिल हो सकता है। कुछ नई परियोजनाओं, जैसे दोधारा चांदनी में 'इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट' और 'लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना' का संयुक्त शिलान्यास भी हो सकता है। 5 मार्च को हुए संसदीय चुनावों के बाद बालेन्द्र शाह ने 27 मार्च को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, जिसके बाद भारत ने उन्हें यात्रा का निमंत्रण दिया था।
इनपुट: IANS



