नेपाल में भयंकर बाढ़: 177 लोगों की मौत, 800 से ज़्यादा लापता, कई भारतीय भी बचाए गए
चीन के तिब्बत क्षेत्र से शुरू हुई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। सीमा पार बहने वाली भोटेकोशी नदी में आई इस बाढ़ के कारण अब तक 177 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 800 से ज़्यादा लोग अब…
चीन के तिब्बत क्षेत्र से शुरू हुई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। सीमा पार बहने वाली भोटेकोशी नदी में आई इस बाढ़ के कारण अब तक 177 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 800 से ज़्यादा लोग अब भी लापता हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल पुलिस ने गुरुवार सुबह 10 बजे तक 177 शव बरामद होने की पुष्टि की। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बाढ़ का सबसे ज़्यादा असर भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों के किनारे बसे ज़िलों पर पड़ा है। इनमें रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी (पूर्व और पश्चिम) शामिल हैं। ज़्यादातर शव नेपाल के दक्षिणी मैदानी इलाक़े चितवन से बरामद किए गए हैं। बाढ़ के कारण रिहायशी इलाक़ों, पनबिजली परियोजनाओं, कस्टम दफ़्तरों और बिजली के बुनियादी ढाँचे को भारी नुक़सान पहुँचा है।
बचाव कार्य और लापता लोग
नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, गुरुवार सुबह 11 बजे तक कुल 826 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया था। लापता लोगों में 579 पर्यटक भी शामिल हैं, हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि वे विदेशी थे या घरेलू। इसके अलावा, सुरक्षा बलों के जवान भी लापता हैं, जिनमें नेपाली सेना के 48, नेपाल पुलिस के 28 और आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स (APF) के 13 जवान शामिल हैं। साथ ही 162 अन्य लोग भी लापता बताए जा रहे हैं।
इस बीच, नेपाली सेना ने गुरुवार सुबह एक बड़ा बचाव अभियान चलाया। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि सेना ने बाढ़ से सबसे बुरी तरह प्रभावित टिमुरे इलाक़े से 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है।
प्रधानमंत्री ने लिया जायज़ा
हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने गुरुवार सुबह नुवाकोट ज़िले की बाढ़ प्रभावित बिदुर नगरपालिका का दौरा किया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने बताया कि इस दौरे का मक़सद बाढ़ से हुए नुक़सान का आकलन करना और राहत, पुनर्वास व बाधित सेवाओं को फिर से शुरू करने पर स्थानीय अधिकारियों के साथ चर्चा करना था। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री सभी बाढ़ पीड़ित इलाक़ों में राहत कार्यों और क्षतिग्रस्त ढाँचे के पुनर्निर्माण में तेज़ी लाने के लिए ज़रूरी निर्देश जारी करेंगे।
इनपुट: IANS



