रविवार, 2 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान में अल्पसंख्यक बच्चियों का जबरन धर्मांतरण: यूरोपीय संसद ने जताई गंभीर चिंता, कार्रवाई की मांग

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की बच्चियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की बढ़ती घटनाओं पर यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर गहरी चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इ

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक बच्चियों का जबरन धर्मांतरण: यूरोपीय संसद ने जताई गंभीर चिंता, कार्रवाई की मांग
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की बच्चियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की बढ़ती घटनाओं पर यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर गहरी चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव में पाकिस्तानी अधिकारियों से इन गंभीर मामलों पर रोक लगाने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।

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प्रस्ताव में 13 वर्षीय ईसाई लड़की मारिया शहबाज के मामले को विशेष रूप से उजागर किया गया। आरोप है कि जुलाई 2025 में 30 वर्षीय शेहरयार अहमद ने मारिया का अपहरण कर लिया था और उसे जबरन इस्लाम कबूल करवाकर शादी के लिए मजबूर किया।

कानूनी प्रक्रिया और अदालती फैसले पर सवाल

यूरोपीय संसद के सदस्यों ने इस मामले में हुई कानूनी कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने उल्लेख किया कि लड़की के नाबालिग होने के सबूतों और आधिकारिक दस्तावेजों में कथित हेरफेर के बावजूद, पाकिस्तान की संघीय संवैधानिक अदालत ने आरोपी के पक्ष में फैसला सुनाया और बच्ची को उसी के पास वापस भेज दिया। संसद ने अदालत के इस फैसले की कड़ी आलोचना की है।

सांसदों ने मांग की कि मारिया शहबाज को इस दर्दनाक अनुभव से उबरने के लिए कानूनी सहायता और मानसिक स्वास्थ्य सहयोग तुरंत उपलब्ध कराया जाए।

हैरान करने वाले आंकड़े और संस्थागत विफलता

प्रस्ताव में मानवाधिकार संगठनों के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि पाकिस्तान में हर साल अल्पसंख्यक समुदायों की 1,000 से अधिक नाबालिग बच्चियों को ऐसे अत्याचारों का सामना करना पड़ता है। संयुक्त राष्ट्र के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह के कुल मामलों में लगभग 25 प्रतिशत पीड़ित ईसाई लड़कियां होती हैं।

यूरोपीय संसद ने उन आरोपों पर भी चिंता जताई, जिनमें कहा गया है कि कई बार स्थानीय अधिकारी इन मामलों में मिलीभगत करते हैं और अदालतें बाल संरक्षण कानूनों की अनदेखी करती हैं, जिससे ऐसी घटनाओं को बढ़ावा मिलता है।

यूरोपीय संसद की प्रमुख मांगें

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, यूरोपीय संसद ने इस्लामाबाद से कई ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। इसमें बाल विवाह को समाप्त करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना और अल्पसंख्यक समुदायों के पीड़ित परिवारों की शिकायतों के समाधान के लिए एक राष्ट्रीय तंत्र बनाना शामिल है। उन्होंने यह भी मांग की कि अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के सभी मामलों की पारदर्शी जांच हो, पीड़ित बच्चियों को उनके परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाया जाए और कानूनी सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए।

इनपुट: IANS

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