भारत के GI टैग वाले उत्पादों को मिलेगा वैश्विक बाज़ार, दो प्रमुख सरकारी विभागों ने मिलाया हाथ
भारत के खास भौगोलिक पहचान (GI) वाले उत्पादों को अब वैश्विक बाज़ार में एक नई पहचान दिलाने की तैयारी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने उद्योग एवं…
भारत के खास भौगोलिक पहचान (GI) वाले उत्पादों को अब वैश्विक बाज़ार में एक नई पहचान दिलाने की तैयारी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत के विशिष्ट जीआई उत्पादों का व्यवसायीकरण करना और उन्हें दुनिया भर के बाज़ारों तक पहुँचाना है।
यह समझौता देश के उन कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों की आजीविका सुधारने में मदद करेगा जो इन खास उत्पादों से जुड़े हैं। साथ ही, यह सरकार की 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) पहल को भी मजबूती प्रदान करेगा। सरकार द्वारा मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इस सहयोग को भारतीय उत्पादों के लिए एक मील का पत्थर बताया गया है।
साझेदारी का मकसद और रूपरेखा
इस एमओयू के तहत एक ऐसा सहयोगी ढाँचा तैयार किया जाएगा, जो भारतीय जीआई उत्पादों के व्यवसायीकरण, गुणवत्ता को मानकीकृत करने और बाज़ार में उनकी पहुँच बढ़ाने पर काम करेगा। आपको बता दें कि डीपीआईआईटी वह नोडल विभाग है जो भौगोलिक संकेत (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत जीआई टैग के पंजीकरण और कानूनी सुरक्षा का काम देखता है। वहीं, एमएसएमई मंत्रालय देश भर में छोटे उद्यमों, पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों के विकास और वित्तीय मजबूती के लिए काम करने वाला नोडल मंत्रालय है।
डिजिटल कॉमर्स और वैश्विक प्रदर्शनियों पर ज़ोर
इस संयुक्त पहल के तहत दोनों विभाग मिलकर कई कदम उठाएँगे। वे अपने कार्यक्रमों में 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) को एकीकृत करेंगे। इसके अलावा, जीआई समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को एक खास "भारत जीआई" बैनर के तहत ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने में मदद की जाएगी। इन उत्पादों के घरेलू और वैश्विक विपणन के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनियों और क्रेता-विक्रेता बैठकों में विशेष जीआई पवेलियन को भी सह-प्रायोजित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यह समझौता बौद्धिक संपदा संरक्षण (डीपीआईआईटी की ज़िम्मेदारी) और उद्यम विकास (एमएसएमई मंत्रालय की ज़िम्मेदारी) को एक साथ लाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस सहयोग से भारत के जीआई इकोसिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे कारीगरों की क्षमता बढ़ेगी, वे डिजिटल रूप से सशक्त होंगे और बाज़ार तक उनकी पहुँच बेहतर होगी।
इनपुट: IANS



