मेघालय: एडवोकेट जनरल अमित कुमार के खिलाफ लामबंद हुए वकील, पद से हटाने की मांग
मेघालय में राज्य के एडवोकेट जनरल (AG) अमित कुमार और कानूनी बिरादरी के बीच टकराव गहरा गया है। शिलांग में एक वकील से मारपीट की घटना पर सुनवाई के दौरान AG द्वारा की गई एक टिप्पणी के बाद राज्य के दो सबसे…
मेघालय में राज्य के एडवोकेट जनरल (AG) अमित कुमार और कानूनी बिरादरी के बीच टकराव गहरा गया है। शिलांग में एक वकील से मारपीट की घटना पर सुनवाई के दौरान AG द्वारा की गई एक टिप्पणी के बाद राज्य के दो सबसे बड़े बार एसोसिएशनों ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर 400 से अधिक वकीलों ने अपनी सहमति जताई है।
मेघालय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और शिलांग बार एसोसिएशन ने एक संयुक्त असाधारण आम बैठक (EGM) बुलाकर यह कड़ा फैसला लिया। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि एसोसिएशन के सदस्य अमित कुमार को राज्य के एडवोकेट जनरल के रूप में मान्यता नहीं देंगे। इसके साथ ही दोनों एसोसिएशनों ने उनका नाम अपनी सदस्यता सूची से भी हटा दिया है।
विवाद की जड़ क्या है?
यह पूरा विवाद मेघालय हाईकोर्ट में चल रहे एक स्वतः संज्ञान मामले से जुड़ा है। मामला शिलांग के एक वकील से जुड़ा है, जिन पर एक इंटर्न से छेड़छाड़ का आरोप लगने के बाद हाइन्यूट्रेप नेशनल यूथ फ्रंट (HNYF) के सदस्यों ने कथित तौर पर उन्हें चैंबर से खींचकर सार्वजनिक रूप से घुमाया और मारपीट की थी।
इसी मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल अमित कुमार ने कथित तौर पर यह टिप्पणी की थी कि बार एसोसिएशन महिला वकीलों को सुरक्षित माहौल देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में पर्याप्त रूप से सफल नहीं रहे हैं। बार एसोसिएशनों ने इस बयान को पूरे कानूनी समुदाय पर एक व्यापक आरोप मानते हुए इस पर आपत्ति जताई। बताया गया है कि इस मुद्दे पर उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया, लेकिन उनके जवाब से वकील संतुष्ट नहीं हुए।
हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान और कार्रवाई
वकील के साथ हुई घटना के बाद बार एसोसिएशनों ने मुख्य न्यायाधीश रेवती मोहिते डेरे से संपर्क कर आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने वकील पर हमले को रोकने में लापरवाही बरती। 31 जुलाई की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगदोह की पीठ ने भी यह टिप्पणी की थी कि पुलिस मौके पर मौजूद होने के बावजूद हस्तक्षेप करने में विफल रही। बाद में, 3 अगस्त को अदालत को सूचित किया गया कि HNYF के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
इसी मामले में हाईकोर्ट ने महिला वकीलों और इंटर्न की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अलग से विचार करने का निर्णय लिया है। इसमें राज्य बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भी पक्षकार बनाकर जवाब मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होनी है, जबकि एडवोकेट जनरल को हटाने की मांग पर अब मेघालय सरकार को फैसला लेना है।
इनपुट: IANS



