शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

सैम पित्रोदा ने RSS पर न्यूयॉर्क के मेयर की टिप्पणी का किया समर्थन, कहा- 'उनकी बातों में कुछ सच्चाई'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी की आलोचनात्मक टिप्पणी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ममदानी की बातों में 'कुछ सच्चाई'…

सैम पित्रोदा ने RSS पर न्यूयॉर्क के मेयर की टिप्पणी का किया समर्थन, कहा- 'उनकी बातों में कुछ सच्चाई'
(फोटो: IANS)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी की आलोचनात्मक टिप्पणी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ममदानी की बातों में 'कुछ सच्चाई' है, जो भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति से जुड़ी चिंताओं को दर्शाती है। समाचार एजेंसी IANS को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में हुआ कार्यक्रम एक निजी आयोजन था और हर संगठन को ऐसा करने का अधिकार है।

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पित्रोदा ने कहा, "मैं जानता हूं कि न्यूयॉर्क के मेयर ने अपने विचार व्यक्त किए हैं, लेकिन वह एक निजी कार्यक्रम था। हर किसी को अपना निजी कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार है। इसमें कोई समस्या नहीं है।" जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ममदानी की राय से सहमत हैं, तो उन्होंने इसे मेयर का व्यक्तिगत विचार बताया, लेकिन साथ ही भारत में बढ़े 'संघर्ष और नफरत' पर चिंता जताई।

भारत का विचार और मौजूदा हालात

भारत के अपने दृष्टिकोण को साझा करते हुए सैम पित्रोदा ने एक ऐसे धर्मनिरपेक्ष देश की वकालत की, जिसकी कल्पना संस्थापक नेताओं ने की थी। उन्होंने कहा, "मैं ऐसे भारत में विश्वास करता हूं जहां धर्म, जाति, भाषा या राज्य के आधार पर कोई भेदभाव न हो।" उन्होंने समानता, सत्य, विश्वास, प्रेम और न्याय जैसे मूल्यों पर जोर दिया।

अपने बचपन को याद करते हुए पित्रोदा ने कहा कि वह एक ऐसे भारत में पले-बढ़े जहाँ विभिन्न समुदाय सद्भाव से रहते थे। उन्होंने बताया, "मैं एक छोटे से आदिवासी गांव में पला-बढ़ा। हमारे सामने मुस्लिम परिवार रहता था, बाईं तरफ जैन परिवार था, दाईं तरफ सिख परिवार था और पीछे आदिवासी ओड़िया समुदाय के लोग रहते थे। हम सब शांति और सद्भाव के साथ रहते थे। कोई संघर्ष नहीं था।"

RSS की कथनी और करनी पर सवाल

पित्रोदा ने आरोप लगाया कि आज देश में मुसलमानों और ईसाइयों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है। उन्होंने कहा, "आप किसी आम मुस्लिम या ईसाई से पूछिए कि पिछले 15 वर्षों में उन्होंने कैसा महसूस किया है, उनके चर्चों और समुदायों के साथ क्या हुआ है, वे आपको खुद बताएंगे।"

उन्होंने RSS के बयानों और उसके कार्यों में अंतर होने का भी आरोप लगाया। पित्रोदा ने कहा, "उनकी बातें कुछ और कहती हैं और उनके काम कुछ और। इसलिए लोगों के लिए आरएसएस को जानना अच्छा है, लेकिन मैं उनकी बातों से ज्यादा उनके कामों पर ध्यान दूंगा। मेरे लिए कर्म शब्दों से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।" हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि वह व्यक्तिगत रूप से कुछ RSS सदस्यों को जानते हैं और वैचारिक मतभेदों के बावजूद उनका सम्मान करते हैं।

अंत में, पित्रोदा ने RSS समेत सभी भारतीय संगठनों से देश के संस्थापक सिद्धांतों की ओर लौटने की अपील की। उन्होंने कहा, "भारत सबका है। भारत हिंदुओं, मुसलमानों, ईसाइयों, यहूदियों, दलितों और हर समुदाय का है।"

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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