महाराष्ट्र: महिला किसानों को अब मिलेगी कानूनी पहचान, सरकार लाई 'सशक्तिकरण अधिनियम, 2026'
महाराष्ट्र की लाखों महिला किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में उनके योगदान को औपचारिक मान्यता देना और उन्हें सशक्त बनाना
महाराष्ट्र की लाखों महिला किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में उनके योगदान को औपचारिक मान्यता देना और उन्हें सशक्त बनाना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने बुधवार को विधानसभा में 'महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026' का मसौदा प्रस्तुत किया। यह कानून उन महिलाओं को पहचान देगा जो दशकों से खेतों में काम तो कर रही थीं, लेकिन भूमि का मालिकाना हक न होने के कारण सरकारी लाभों से वंचित रह जाती थीं।
यह विधेयक कृषि क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही लैंगिक असमानताओं को दूर करने का एक प्रयास है। अब तक, कृषि से जुड़े औपचारिक लाभ और ऋण जैसी सुविधाएं मुख्य रूप से केवल भूमिधारकों तक ही सीमित रही हैं, जिससे बड़ी संख्या में महिला श्रमिक उपेक्षित रह जाती थीं। नया कानून इस व्यवस्था को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कानूनी पहचान और व्यापक परिभाषा
इस विधेयक की सबसे खास बात यह है कि इसके तहत महिला कृषि श्रमिकों को औपचारिक 'महिला किसान प्रमाण पत्र' जारी किया जाएगा। इसके लिए 'किसान' शब्द की परिभाषा को भी व्यापक बनाया गया है। अब इसमें महाराष्ट्र की कोई भी महिला निवासी शामिल होगी जो फसल उगाने, मुर्गी पालन, डेयरी, मत्स्य पालन, रेशम उत्पादन, और कृषि-वानिकी जैसे कामों में सीधे तौर पर लगी है।
इस परिभाषा के दायरे में भूमिहीन श्रमिक, बटाईदार, भूमिहीन पशुपालक, बागान श्रमिक और वे महिलाएं भी आएंगी जो साल में कम से कम एक मौसम के लिए कृषि कार्य करती हैं, भले ही वे इसके लिए प्रवास करती हों।
वित्तीय मजबूती और निगरानी
विधेयक के प्रावधानों को ज़मीन पर उतारने के लिए एक विशेष 'महिला किसानों के लिए महाराष्ट्र राज्य कोष' की स्थापना भी अनिवार्य की गई है। इस कोष में राज्य की संचित निधि, केंद्र सरकार के अनुदान और अन्य निजी या सार्वजनिक दान से पैसा आएगा। इस फंड का उपयोग विशेष रूप से महिला किसानों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम चलाने, उन्हें आसानी से ऋण उपलब्ध कराने, उनका एक डेटाबेस बनाने और उनके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करने में किया जाएगा।
कानून के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक जवाबदेही प्रणाली भी बनाई गई है। इसके तहत एक 'महिला किसान सशक्तिकरण प्रकोष्ठ' और एक 'राज्य निगरानी समिति' का गठन किया जाएगा जो इस अधिनियम की प्रगति पर नजर रखेगी।
इनपुट: IANS



