महाराष्ट्र में डेटा सेंटरों के बढ़ते प्रभाव पर मंथन, डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति का गठन
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को देश का प्रमुख डेटा सेंटर हब बनाने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना के बीच इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। परमाणु…
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को देश का प्रमुख डेटा सेंटर हब बनाने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना के बीच इसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल काकोडकर इस समिति की अध्यक्षता करेंगे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह समिति डेटा सेंटरों से जुड़ी चिंताओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन कर तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
यह कदम महाराष्ट्र विधान परिषद में 2026 के मानसून सत्र के दौरान उठाए गए एक 'ध्यानाकर्षण प्रस्ताव' के बाद उठाया गया है। सदस्यों ने डेटा सेंटरों द्वारा बिजली, पानी और ज़मीन की भारी खपत, बढ़ते तापमान, ध्वनि प्रदूषण और स्थानीय नागरिकों के जीवन पर पड़ने वाले असर को लेकर गंभीर चिंताएँ जताई थीं। इसके जवाब में, उद्योग मंत्री उदय सामंत ने सदन को विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का आश्वासन दिया था, जिसे अब पूरा किया गया है।
समिति का स्वरूप और कार्यक्षेत्र
सोमवार देर रात जारी सरकारी आदेश के मुताबिक, इस विशेषज्ञ समिति में शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी, उद्योग जगत के दिग्गज और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। इसका मुख्य काम डेटा सेंटरों के कारण पर्यावरण, बुनियादी ढाँचे और सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने पर पड़ने वाले प्रभावों का गहराई से अध्ययन करना है। समिति का उद्देश्य टिकाऊ संचालन के लिए निष्पक्ष, वैज्ञानिक और तकनीकी मूल्यांकन करना है।
समिति के प्रमुख कार्यों में ऊर्जा-कुशल और हरित डेटा सेंटरों के लिए दिशानिर्देश तैयार करना, पानी बचाने व रीसायकल करने के लिए वैकल्पिक तकनीकों की सिफारिश करना और डेटा सेंटरों को लेकर आम लोगों की गलतफहमियों को दूर करना शामिल है। इसके अलावा, समिति राज्य में डेटा सेंटरों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी सुझाएगी।
समिति के प्रमुख सदस्य
डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता वाली इस समिति में कई महत्वपूर्ण हस्तियाँ शामिल हैं। इनमें ऊर्जा, जल संसाधन, उद्योग और पर्यावरण विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव व प्रधान सचिव, MIDC के सीईओ, उद्योग आयुक्त, MSEDCL और MSETCL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, विशेषज्ञों के तौर पर नागपुर स्थित NEERI के निदेशक डॉ. एस. वेंकट मोहन, IIT बॉम्बे के प्रो. एम.वी. राणे, भारती विद्यापीठ, पुणे की प्रो. डॉ. शमिता कुमार, योटा डेटा सर्विसेज के श्रीनिवास पी., अमेज़न वेब सर्विसेज के प्रसाद कल्याणरमन और प्रो. डॉ. श्याम आर. असोलेकर को भी समिति का सदस्य बनाया गया है। समिति को आवश्यकतानुसार अन्य सरकारी अधिकारियों और विषय-विशेषज्ञों को बुलाने का भी अधिकार होगा।
इनपुट: IANS



