सिंहस्थ कुंभ 2026-28: राष्ट्रपति मुर्मु को ध्वजारोहण समारोह के लिए महाराष्ट्र सरकार का निमंत्रण
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में होने वाले भव्य सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एक…
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में होने वाले भव्य सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए महाराष्ट्र सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में उनसे मुलाकात की और 31 अक्टूबर को होने वाले ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने का आग्रह किया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह समारोह कुंभ मेले से जुड़े उत्सवों की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक होगा।
इस उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकांत शिंदे और सुनेत्रा पवार भी मौजूद थे। उनके अलावा राज्य के प्रमुख कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी इस मुलाकात का हिस्सा बने।
कुंभ मेले का शुभारंभ और अन्य कार्यक्रम
राष्ट्रपति मुर्मु को सिर्फ ध्वजारोहण के लिए ही नहीं, बल्कि उद्घाटन दिवस पर होने वाले कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, इन कार्यक्रमों में गोदावरी नदी के तट पर भव्य 'गोदा आरती', नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला प्राधिकरण के आधिकारिक पोर्टल का शुभारंभ, और कुंभ के आधिकारिक गीत का विमोचन शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक स्मारक कॉफी टेबल बुक और एक विशेष कुंभ मेला डाक टिकट भी जारी किया जाएगा।
महाराष्ट्र की विरासत की झलक
इस अवसर पर, मुख्यमंत्री फडणवीस ने राष्ट्रपति मुर्मु को एक विशेष रूप से डिजाइन किया गया कलात्मक निमंत्रण पत्र भेंट किया। इसके साथ ही एक अनूठा उपहार भी दिया गया, जिसमें महाराष्ट्र की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक थी। इस उपहार में राज्य की आदिवासी उद्यमिता, वस्त्र कला, कृषि उपज और पाक परंपराओं को दर्शाने वाली वस्तुएं शामिल थीं।
उपहार में प्राकृतिक अगरबत्ती, अनाज और महुआ के फूलों से बने उत्पाद, बांस की हस्तनिर्मित कलाकृतियां और जंगली शहद जैसी चीजें शामिल थीं। ये वस्तुएं सतत संसाधन प्रबंधन और आदिवासी कारीगरों की आत्मनिर्भरता को उजागर करती हैं। साथ ही, पारंपरिक बुनाई विरासत के प्रतीक के तौर पर एक प्रामाणिक येओला पैठानी साड़ी भी भेंट की गई। उपहार में नासिक के प्रसिद्ध काले किशमिश, काजू और पारंपरिक चिवड़ा भी शामिल थे।
तैयारियों पर संतोष
गौरतलब है कि यह सिंहस्थ कुंभ मेला अक्टूबर 2026 से जुलाई 2028 तक आयोजित किया जाएगा, जिसके मुख्य पवित्र स्नान 2027 में होंगे। हाल ही में, मुख्यमंत्री फडणवीस ने नासिक और त्र्यंबकेश्वर में चल रही विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे की तैयारियों की समीक्षा की थी। उन्होंने घाटों के विकास, तीर्थयात्रा मार्गों और यातायात प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सभी काम निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे हो जाएंगे।
इनपुट: IANS



