महाराष्ट्र में अवैध IVF सेंटरों पर लगेगी नकेल, नियम तोड़ने वालों पर MCOCA लगाने की तैयारी में सरकार
महाराष्ट्र में बिना मंजूरी के चल रहे इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और सोनोग्राफी सेंटरों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इन केंद्रों पर होने वाली अवैध लिंग जांच
महाराष्ट्र में बिना मंजूरी के चल रहे इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) और सोनोग्राफी सेंटरों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इन केंद्रों पर होने वाली अवैध लिंग जांच और अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए एक बड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। सरकार नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) जैसा कठोर कानून लगाने पर भी विचार कर रही है।
यह अहम घोषणा बुधवार को राज्य विधानसभा में सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश अबितकर ने की। उन्होंने यह जानकारी विधायक अबू आजमी द्वारा राज्य में अवैध रूप से चल रहे आईवीएफ सेंटरों पर गंभीर चिंता जताए जाने के बाद दी। इस चर्चा में हरीश पिंपल, अजय चौधरी, योगेश सागर और राहुल पाटिल जैसे अन्य विधायकों ने भी सवाल पूछे।
अनियमितताओं पर सरकार का कड़ा रुख
मंत्री अबितकर ने माना कि राज्य में आईवीएफ इलाज और गैर-जरूरी सिजेरियन डिलीवरी (सी-सेक्शन) दोनों में ही चिंताजनक वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, "हम अनैतिक मेडिकल प्रैक्टिस के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाते हैं।" सरकार एक ऐसा नियामक ढांचा तैयार कर रही है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि आईवीएफ की सलाह केवल चिकित्सीय आवश्यकता के आधार पर ही दी जाए।
मंत्री ने साफ किया कि आईवीएफ में गड़बड़ी करने और 'गर्भधारण-पूर्व और प्रसव-पूर्व निदान तकनीक' (PCPNDT) अधिनियम का उल्लंघन करने वालों को कड़ी सजा दी जाएगी। इसके लिए मकोका जैसे कड़े कानूनी प्रावधान लाए जाएंगे, जो दोषी डॉक्टरों, प्रशासनिक कर्मचारियों और अस्पताल प्रबंधन सभी पर लागू होंगे।
हालिया कार्रवाई और भविष्य की योजनाएं
प्रकाश अबितकर ने सदन को हाल में हुई कार्रवाइयों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि बदलापुर और अंबरनाथ में एक अवैध गिरोह का पर्दाफाश किया गया है और इसमें शामिल डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इन डॉक्टरों के मेडिकल लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
इसके अलावा, चंद्रपुर में 'बेबीश्योर क्लिनिक' और 'इंदिरा आईवीएफ सेंटर' के निरीक्षण में कई तरह की ढांचागत और कामकाज से जुड़ी खामियां पाई गईं। मंत्री ने कहा, "दोनों सेंटरों को तत्काल अपना काम रोकने का आदेश दिया गया है, जब तक कि वे आधिकारिक रजिस्ट्रेशन हासिल नहीं कर लेते। यह मामला अभी अदालत में है।" सरकार गरीबों को लाभ पहुंचाने के लिए आईवीएफ सुविधा को 'महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना' में शामिल करने पर भी विचार कर रही है।
इनपुट: IANS



