महाराष्ट्र सूखे की चपेट में, CM फडणवीस और शिंदे ने संभाला मोर्चा, किसानों को राहत का भरोसा
महाराष्ट्र के कई बड़े हिस्से गंभीर सूखे के संकट का सामना कर रहे हैं, जिससे निपटने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। अल नीनो के प्रभाव से हुई कम बारिश ने मराठवाड़ा, विदर्भ, खानदेश और…
महाराष्ट्र के कई बड़े हिस्से गंभीर सूखे के संकट का सामना कर रहे हैं, जिससे निपटने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। अल नीनो के प्रभाव से हुई कम बारिश ने मराठवाड़ा, विदर्भ, खानदेश और पश्चिमी महाराष्ट्र में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत पूरी कैबिनेट जमीनी हालात का जायजा लेने और तत्काल राहत देने के लिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रही है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने खुद लातूर, धाराशिव और सोलापुर जिलों का दौरा शुरू कर दिया है ताकि वे खेतों में जाकर सीधे किसानों से बात कर सकें। उनके दौरे में जौ, खरोसा और लमजाना जैसे गांव शामिल हैं, जहां वे नमी की कमी से जूझ रही फसलों का निरीक्षण कर रहे हैं। भाजपा विधायक अभिमन्यु पवार ने बताया कि सीएम खरोसा में स्थानीय किसानों से सीधे संवाद करेंगे। इस दौरे में उनके साथ लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले और धाराशिव के प्रभारी मंत्री प्रताप सरनाईक भी मौजूद हैं।
सरकार का एक्शन प्लान
सूखे की स्थिति से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में एक कैबिनेट उप-समिति के गठन की घोषणा की है। इस समिति को राहत उपायों पर तुरंत फैसले लेने के लिए कैबिनेट के बराबर शक्तियां दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार प्रभावित किसानों को मदद देने के लिए केंद्र से आर्थिक सहायता का इंतजार नहीं करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सूखे जैसी स्थिति घोषित करने की शुरुआती अधिसूचना शनिवार तक जारी कर दी जाएगी।
एक साप्ताहिक कैबिनेट बैठक के बाद सीएम फडणवीस ने कहा, "मैं कल से खुद प्रभावित इलाकों का दौरा शुरू करूंगा और मैंने सभी मंत्रियों और चुने हुए प्रतिनिधियों को नुकसान का जायजा लेने के लिए सीधे जमीनी स्तर पर जाने का निर्देश दिया है।" उन्होंने यह भी बताया कि फसल नुकसान का आधिकारिक आकलन (पंचनामा) बुधवार से शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।
उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्री भी मैदान में
एक ओर जहां मुख्यमंत्री मराठवाड़ा का जायजा ले रहे हैं, वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पश्चिमी विदर्भ के बुलढाणा, अकोला और अमरावती जिलों में फसल नुकसान के आकलन का नेतृत्व किया। उन्होंने सभी शिवसेना मंत्रियों को जमीनी स्तर पर जाने, तुरंत पंचनामा करने और प्रभावित गांवों में 'जनता दरबार' लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने भी अमरावती जिले के वारुड-मोर्शी क्षेत्र में सूखे के हालात की समीक्षा की और कलेक्टर को तत्काल प्रशासनिक कदम उठाने का निर्देश दिया।
प्रशासनिक तैयारी और प्राथमिकताएं
राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता अगले सात से आठ महीनों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसके लिए स्थानीय निकायों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। जालना में कलेक्टर आशिमा मित्तल ने एक केंद्रीय 'वॉर रूम' स्थापित करने का आदेश दिया है, जो फसल की स्थिति, चारे की उपलब्धता, पानी के भंडारण और गांवों से संभावित पलायन जैसे आंकड़ों पर रोजाना नजर रखेगा। इस संकट से सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी प्रमुख फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जबकि कोंकण में धान की खेती पर भी असर पड़ा है।
इनपुट: IANS



