शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

‘वोट चोर’ पोस्ट: महुआ मोइत्रा को अदालत का झटका, 24 घंटे में सोशल मीडिया से हटाने का आदेश

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के खिलाफ की गई अपनी सोशल मीडिया टिप्पणियों के मामले में राहत नहीं मिली है। कोलकाता की एक अदालत ने उन्हें 'वोट…

‘वोट चोर’ पोस्ट: महुआ मोइत्रा को अदालत का झटका, 24 घंटे में सोशल मीडिया से हटाने का आदेश
(फोटो: IANS)

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के खिलाफ की गई अपनी सोशल मीडिया टिप्पणियों के मामले में राहत नहीं मिली है। कोलकाता की एक अदालत ने उन्हें 'वोट चोर' कहने वाले अपने दो पोस्ट तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही, अदालत ने भविष्य में भी उनके खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी करने पर रोक लगा दी है।

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यह मामला तब शुरू हुआ जब कृष्णानगर से लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने 3 और 6 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मनोज कुमार अग्रवाल को 'वोट चोर' कहा था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस एसआईआर प्रक्रिया का मोइत्रा जिक्र कर रही थीं, उस समय अग्रवाल राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) थे। इन पोस्ट्स के बाद, अग्रवाल ने पहले मोइत्रा को कानूनी नोटिस भेजा और फिर 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया।

अदालत ने क्या कहा?

गुरुवार को दक्षिण कोलकाता के अलीपुर की एक निचली अदालत ने इस मामले पर सुनवाई की। अदालत ने पाया कि महुआ मोइत्रा के पोस्ट न केवल एक प्रक्रिया की आलोचना कर रहे थे, बल्कि तत्कालीन सीईओ पर सीधे तौर पर गैरकानूनी काम करने का आरोप भी लगा रहे थे। जज ने कहा कि सांसद अपने इन गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहीं, जिससे इन आरोपों के कानूनी आधार पर संदेह पैदा होता है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित में किसी भी प्रक्रिया पर चर्चा या उसकी आलोचना करने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसकी आड़ में किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करना स्वीकार्य नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने मोइत्रा के पोस्ट को आपत्तिजनक माना।

आदेश और आगे की कार्रवाई

अदालत ने महुआ मोइत्रा को आदेश दिया है कि वह अदालत का निर्देश मिलने के 24 घंटे के भीतर दोनों विवादित पोस्ट हटा दें। इसके अलावा, वह इस मामले से जुड़ी कोई भी पुरानी पोस्ट दोबारा शेयर नहीं कर सकतीं और न ही मुख्य सचिव के खिलाफ कोई नई अपमानजनक टिप्पणी कर पाएंगी। अदालत मोइत्रा को एक नोटिस भी भेजेगी, जिसमें पूछा जाएगा कि उनके बयानों पर लगी रोक को स्थायी क्यों न कर दिया जाए।

इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कहा, "मैं 'वोट चोर' को 'वोट चोर' कहने के अपने अधिकार को कायम रखने के लिए अदालत में एक आवेदन दायर करूंगी।"

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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