कोटिया सीमा विवाद: आंध्र प्रदेश के चुनाव कराने की कोशिश के बाद ओडिशा सरकार ने कानूनी कार्रवाई तेज करने का दिया आश्वासन
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से चल रहा कोटिया सीमा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश द्वारा कोरापुट जिले के विवादित गांवों में पंचायत चुनाव कराने की कोशिश के बाद, ओडिशा…
ओडिशा और आंध्र प्रदेश के बीच लंबे समय से चल रहा कोटिया सीमा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश द्वारा कोरापुट जिले के विवादित गांवों में पंचायत चुनाव कराने की कोशिश के बाद, ओडिशा सरकार ने मामले के जल्द और स्थायी समाधान के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का संकल्प लिया है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बुधवार को एक वर्चुअल बैठक में स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन को हालात पर पैनी नजर बनाए रखने का निर्देश दिया है।
कानूनी और प्रशासनिक कदम
इस बैठक के दौरान मंत्री पुजारी ने राज्य के एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य से कानूनी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की और राज्य के हितों की रक्षा के लिए सलाह मांगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विवाद को सुलझाने के लिए कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और सीमावर्ती क्षेत्रों में ओडिशा की प्रशासनिक उपस्थिति को और मजबूत किया जाए।
पुजारी ने कहा, "कोटिया क्षेत्र में शांति, स्थिरता और जनता का भरोसा बनाए रखना, साथ ही राज्य के कानूनी अधिकारों और हितों की रक्षा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। राज्य सरकार इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद के जल्द और स्थायी समाधान के लिए सभी जरूरी और उचित कदम उठाने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।"
विवाद की पृष्ठभूमि
कोटिया ग्राम पंचायत के गांवों को लेकर यह विवाद कई वर्षों से दोनों राज्यों के बीच बातचीत और कानूनी कार्यवाही का केंद्र रहा है। मामला तब और जटिल हो गया जब फरवरी 2021 में आंध्र प्रदेश ने इन विवादित गांवों में पंचायत चुनाव करा दिए। इस पर ओडिशा ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी।
पिछली बीजेडी सरकार पर निशाना साधते हुए पुजारी ने कहा कि 2006 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ओडिशा का मामला खारिज किए जाने के बाद, तत्कालीन सरकार ने 16 साल के अंतराल के बाद 2022 में एक और मामला दायर किया, जो अभी भी लंबित है।
समन्वय और रणनीति
मामले की कानूनी संवेदनशीलता को देखते हुए, मंत्री ने विभिन्न विभागों, कानूनी विशेषज्ञों और जिला अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक रिकॉर्ड, जनगणना के आंकड़ों और प्रशासनिक तथ्यों के आधार पर एक ठोस रणनीति तैयार करना है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे एडवोकेट जनरल को सभी जरूरी दस्तावेज और सहायता मुहैया कराएं। राज्य सरकार कोटिया में कल्याणकारी योजनाएं और आवश्यक सेवाएं लगातार प्रदान कर रही है और एक मंत्री-स्तरीय समिति विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करती है।
इनपुट: IANS



