सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
देश

केरल में बारिश में भारी कमी: कृषि को 'अल नीनो' के प्रभाव से बचाने के लिए सरकार बनाएगी निगरानी इकाई

केरल सरकार राज्य में वर्षा की 28 प्रतिशत कमी और बढ़ते तापमान से उत्पन्न संकट से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। कृषि पर जलवायु परिवर्तन और 'अल नीनो' के प्रभावों को कम करने के लिए…

केरल में बारिश में भारी कमी: कृषि को 'अल नीनो' के प्रभाव से बचाने के लिए सरकार बनाएगी निगरानी इकाई
(फोटो: IANS)

केरल सरकार राज्य में वर्षा की 28 प्रतिशत कमी और बढ़ते तापमान से उत्पन्न संकट से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। कृषि पर जलवायु परिवर्तन और 'अल नीनो' के प्रभावों को कम करने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच तालमेल स्थापित करने हेतु एक राज्य-स्तरीय निगरानी इकाई का गठन किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला सोमवार को तिरुवनंतपुरम में विधानसभा बैंक्वेट हॉल में आयोजित एक मंत्री-स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी ने की।

विज्ञापन

कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के कुछ हिस्सों में तापमान पहले ही दो डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है और आने वाले वर्षों में तापमान और जल संकट में और वृद्धि की संभावना है। प्रस्तावित निगरानी इकाई में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और नाबार्ड जैसी संस्थाओं समेत कई सरकारी विभाग शामिल होंगे। इसका मुख्य काम निवारक उपायों का समन्वय करना और उपलब्ध निधियों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना होगा।

राज्य से लेकर पंचायत स्तर तक कार्य योजना

सरकार ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक, दोनों तरह की योजनाएं बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत स्थानीय चुनौतियों से निपटने के लिए जिला और पंचायत स्तर पर भी विशेष कार्य योजनाएं तैयार की जाएंगी। जिला कलेक्टरों को स्थानीय समस्याओं का आकलन करने और उचित योजना बनाने के लिए बैठकें आयोजित करने का निर्देश दिया गया है, जिसकी प्रगति की राज्य स्तर पर नियमित रूप से समीक्षा की जाएगी।

जल संरक्षण और हरियाली पर होगा जोर

तैयार की जाने वाली कार्य योजना में जल स्रोतों की सुरक्षा, नहरों और तालाबों का जीर्णोद्धार, ड्रिप सिंचाई और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने जैसे उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें जल नियंत्रण प्रणालियों में सुधार और जल भंडारण कुओं का निर्माण भी शामिल है। इसके अलावा, कृषि क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने और मिट्टी की नमी बनाए रखने के उपायों पर भी काम किया जाएगा। मंत्री ने कृषि भूमि, फसलों और इस पर निर्भर आजीविका की रक्षा के लिए विभागों के बीच तत्काल समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

अन्य मंत्रियों ने भी जताई चिंता

बैठक में मौजूद अन्य मंत्रियों ने भी इस मुद्दे पर अपने विचार रखे। जल संसाधन मंत्री मॉन्स जोसेफ ने जल संरक्षण, बाढ़ की रोकथाम और विभागों के बीच बेहतर समन्वय को प्राथमिकता देने की बात कही। वहीं, स्थानीय स्वशासन मंत्री केएम शाजी ने कहा कि स्थानीय निकाय प्राकृतिक जल निकासी चैनलों की सुरक्षा और जल स्रोतों के पुनर्स्थापन के प्रयासों को मजबूत करेंगे। राजस्व मंत्री एपी अनिलकुमार ने 2018 की बाढ़ का उल्लेख करते हुए कृषि क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए दीर्घकालिक उपायों और कृषि समृद्धि कोष के प्रभावी उपयोग का आह्वान किया। कुट्टानाड क्षेत्र की विशेष चुनौतियों को देखते हुए, जल संसाधन और राजस्व विभागों के परामर्श से एक विशेष मिशन पर भी विचार किया जाएगा।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →