बुधवार, 1 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
देश

केरल लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भारी चूक, 228 उम्मीदवारों के उत्तर बिना जाँचे ही रैंक लिस्ट जारी

केरल में राज्य योजना बोर्ड के वरिष्ठ पदों पर भर्ती के लिए हुई एक परीक्षा में मूल्यांकन की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है, जिसने एक राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार,

केरल लोक सेवा आयोग की परीक्षा में भारी चूक, 228 उम्मीदवारों के उत्तर बिना जाँचे ही रैंक लिस्ट जारी
(फोटो: IANS)

केरल में राज्य योजना बोर्ड के वरिष्ठ पदों पर भर्ती के लिए हुई एक परीक्षा में मूल्यांकन की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है, जिसने एक राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) द्वारा आयोजित परीक्षा में शामिल हुए सभी 228 उम्मीदवारों के दस वर्णनात्मक उत्तरों को जाँचे बिना ही रैंक लिस्ट जारी कर दी गई, जिससे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

विज्ञापन

यह मामला तब उजागर हुआ जब कुछ असफल उम्मीदवारों ने RTI के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी माँगी। शुरुआती आनाकानी के बाद जब आयोग ने राज्य सूचना आयोग के दखल पर कॉपियाँ मुहैया कराईं, तो पता चला कि कई उत्तरों का मूल्यांकन ही नहीं हुआ था। इस खुलासे के बाद अब उच्च-स्तरीय जाँच की माँग जोर पकड़ रही है।

क्या है पूरा मामला?

यह परीक्षा 13 जुलाई, 2023 को राज्य योजना बोर्ड में तीन प्रमुख पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिनमें 'चीफ, इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवीजन', 'चीफ, पर्सपेक्टिव प्लानिंग डिवीजन' और 'चीफ, प्लानिंग कोऑर्डिनेशन डिवीजन' शामिल हैं। इन पदों का मूल मासिक वेतन 1.25 लाख रुपये है।

आयोग ने 31 मई, 2025 को रैंक सूची जारी कर दी और 'इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवीजन' के लिए पहले स्थान पर रहे उम्मीदवार को तुरंत नियुक्ति भी दे दी। गड़बड़ी का पता चलने के बाद KPSC ने एक आंतरिक सतर्कता जाँच की घोषणा की है। आयोग ने कहा है कि अब सभी उम्मीदवारों के बिना जाँचे गए उत्तरों का मूल्यांकन कर एक संशोधित रैंक सूची तैयार की जाएगी।

राजनीतिक तूल और जाँच की माँग

इस मुद्दे पर राज्य के खेल मंत्री और यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष ओ.जे. जेनिश ने KPSC की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने हजारों नौकरी के उम्मीदवारों का भरोसा तोड़ा है। जेनिश के अनुसार, “सिर्फ अंदरूनी विजिलेंस जांच से भरोसा नहीं जगेगा।” उन्होंने कहा कि वह इस मामले में एक व्यापक और निष्पक्ष जाँच की माँग को लेकर मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन से मिलेंगे।

जेनिश ने यह भी कहा कि अगर जनता को यह शक हो कि पिछले एक दशक में पीएससी का राजनीतिक इस्तेमाल हुआ है, तो इसमें जनता की कोई गलती नहीं है। वहीं, इस मामले में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वामपंथी विपक्ष की चुप्पी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि KPSC बोर्ड के सभी 15 सदस्यों की नियुक्ति पिछली पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल में हुई थी।

इनपुट: IANS

N

News4Social वायर डेस्क

News4Social वायर डेस्क, समाचार एजेंसी IANS से लाइसेंस-प्राप्त खबरें प्रकाशित करता है। इन रिपोर्ट्स की मूल जानकारी एजेंसी से आती है, जिसे हमारी संपादकीय टीम तथ्यों की जाँच के बाद News4Social की स्पष्ट व सहज भाषा-शैली में संपादित एवं पुनर्लिखित करती है — ताकि पाठकों को भरोसेमंद और पठनीय समाचार मिलें। प्रत्येक रिपोर्ट में मूल स्रोत IANS का श्रेय दिया जाता है; तस्वीरें: IANS। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →