केरल PSC ने प्लानिंग बोर्ड की रैंक लिस्ट रद्द की — RTI से खुला था 10 सवालों के मूल्यांकन न होने का राज़
एक RTI आवेदन ने वह खोल दिया जो महीनों तक दबा रहा। केरल के स्टेट प्लानिंग बोर्ड की एक वरिष्ठ भर्ती परीक्षा में 10 वर्णनात्मक सवालों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया था — और यह गड़बड़ी तब उजागर हुई जब उम्म
एक RTI आवेदन ने वह खोल दिया जो महीनों तक दबा रहा। केरल के स्टेट प्लानिंग बोर्ड की एक वरिष्ठ भर्ती परीक्षा में 10 वर्णनात्मक सवालों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया था — और यह गड़बड़ी तब उजागर हुई जब उम्मीदवारों ने आरटीआई के ज़रिए अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियाँ हासिल कीं। इस खुलासे के बाद केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) ने सोमवार को मौजूदा रैंक लिस्ट रद्द करते हुए नए सिरे से मूल्यांकन और आंतरिक विजिलेंस जाँच के आदेश दे दिए।
क्या थी गड़बड़ी?
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह परीक्षा स्टेट प्लानिंग बोर्ड के तीन वरिष्ठ पदों — चीफ (उद्योग और बुनियादी ढाँचा विभाग), चीफ (परिप्रेक्ष्य योजना विभाग) और चीफ (योजना समन्वय विभाग) — के लिए आयोजित की गई थी। इन पदों पर मूल वेतन लगभग 1.25 लाख रुपये प्रति माह है और परीक्षा में कुल 228 उम्मीदवार शामिल हुए थे। चीफ (उद्योग और बुनियादी ढाँचा विभाग) पद की परीक्षा में जो 10 वर्णनात्मक प्रश्न बिना जाँचे छोड़ दिए गए, उनके अंक जुड़ते तो मौजूदा रैंकिंग में बड़े उलटफेर संभव थे।
महीनों तक क्यों छिपी रही बात?
शुरुआत में उम्मीदवारों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियाँ देने से इनकार किया गया। यही वजह रही कि यह चूक लंबे समय तक सामने नहीं आई। आखिरकार सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत की गई लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद जब उम्मीदवारों को उनकी उत्तर पुस्तिकाएँ मिलीं, तभी मूल्यांकन की यह गंभीर चूक उजागर हो सकी। इसके बाद विरोध प्रदर्शन हुए और सुधारात्मक कार्रवाई की माँग ज़ोर पकड़ने लगी।
PSC का फैसला और आगे की राह
कमीशन ने अब उन 10 छूटे हुए उत्तरों का पुनर्मूल्यांकन कराने का निर्णय लिया है, जिसके आधार पर एक संशोधित रैंक लिस्ट तैयार की जाएगी। साथ ही, आंतरिक विजिलेंस विंग को तीन बिंदुओं पर जाँच सौंपी गई है — यह लापरवाही हुई कैसे, निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रियाओं का उल्लंघन हुआ या नहीं, और जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए या नहीं। रैंक लिस्ट रद्द करने का यह कदम परोक्ष रूप से इस चूक की गंभीरता की आयोग की स्वीकृति भी माना जा रहा है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल का है। उस समय PSC के सभी 15 सदस्य तत्कालीन सत्ताधारी वामपंथी गठबंधन द्वारा नामित थे। फिलहाल राज्य सरकार 'इंतजार करो और देखो' की नीति पर चल रही है — चूँकि PSC की परंपरा यही रही है कि शिकायत मिलने पर पहले आंतरिक विजिलेंस विंग जाँच करे, फिर अगला कदम तय हो।
इस घटना ने केरल PSC की साख पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसे इस संवैधानिक भर्ती संस्था की हाल के वर्षों की सबसे बड़ी परीक्षा-अनियमितताओं में से एक माना जा रहा है। जाँच के नतीजे न केवल जवाबदेही तय करेंगे, बल्कि राज्य की भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का भरोसा बहाल करने की दिशा में भी अहम साबित होंगे।
इनपुट: IANS



