मंगलवार, 18 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
देश

मैसूर दशहरा में 'कंबाला' के प्रस्ताव पर बढ़ा विवाद, शाही परिवार ने परंपरा की दुहाई दी

कर्नाटक के विश्व प्रसिद्ध मैसूर दशहरा समारोह में इस साल पारंपरिक भैंस दौड़ 'कंबाला' को शामिल करने के प्रस्ताव पर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य की कांग्रेस सरकार और मैसूर के शाही परिवार के बीच इस मुद्दे

मैसूर दशहरा में 'कंबाला' के प्रस्ताव पर बढ़ा विवाद, शाही परिवार ने परंपरा की दुहाई दी
(फोटो: IANS)

कर्नाटक के विश्व प्रसिद्ध मैसूर दशहरा समारोह में इस साल पारंपरिक भैंस दौड़ 'कंबाला' को शामिल करने के प्रस्ताव पर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य की कांग्रेस सरकार और मैसूर के शाही परिवार के बीच इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शाही परिवार, भाजपा नेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा है कि इससे उत्सव की सदियों पुरानी पारंपरिक पहचान और विरासत पर असर पड़ेगा।

विज्ञापन

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने संकेत दिए कि सरकार दशहरा में कुछ नए सांस्कृतिक कार्यक्रम जोड़ने पर विचार कर रही है। हालांकि, सरकार ने यह भी घोषणा की है कि सूखे जैसे हालात के बावजूद इस वर्ष 'नादा हब्बा दशहरा-2026' का आयोजन 11 दिनों तक भव्य तरीके से किया जाएगा। इसी भव्य आयोजन के तहत तटीय कर्नाटक के लोकप्रिय खेल कंबाला को जोड़ने का विचार सामने आया, जो 'कांतारा चैप्टर-1' फिल्म के बाद देश भर में प्रसिद्ध हुआ।

शाही परिवार का कड़ा विरोध

मैसूर के शाही परिवार के सदस्य और भाजपा सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार ने इस प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने शनिवार को बताया कि उच्च-स्तरीय समिति की बैठक में उन्होंने अपनी आपत्ति स्पष्ट रूप से दर्ज करा दी थी। उन्होंने कहा, "मैंने बैठक में कंबाला को शामिल करने के प्रस्ताव का साफ तौर पर विरोध किया है। दशहरा की अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान है, जबकि कंबाला एक अलग परंपरा है।"

यदुवीर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने बार-बार जनता की भावनाओं को नजरअंदाज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया, "हम कंबाला खेल के विरोध में नहीं हैं। हमारा सिर्फ इतना कहना है कि कंबाला का आयोजन मैसूर दशहरा समारोह के हिस्से के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि यह मैसूर के लोगों की इच्छा के विरुद्ध होगा।

अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

भाजपा के पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा ने भी शाही परिवार का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को उनकी भावनाओं के खिलाफ नहीं जाना चाहिए। उन्होंने दशहरा को एक पारंपरिक और सांस्कृतिक पर्व बताते हुए इसकी परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान करने की बात कही।

वहीं, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि सरकार कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले सभी सुझावों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, "हम राज्य की सभी परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखकर फैसला करेंगे... यह फैसला अकेले डीके शिवकुमार नहीं लेंगे। सभी संबंधित लोगों से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।"

'पास सिस्टम' खत्म करने की मांग

इस विवाद के बीच, यदुवीर वाडियार ने सरकार से दशहरा कार्यक्रमों के लिए 'पास सिस्टम' को पूरी तरह खत्म करने की भी अपील की। उन्होंने कहा, "मैंने सरकार से 'पास' व्यवस्था पूरी तरह खत्म करने का अनुरोध किया है। लोग समारोह का आनंद लेने से ज्यादा पास हासिल करने में लग जाते हैं।" उन्होंने सुझाव दिया कि दशहरा को उसकी परंपराओं और उद्देश्य के अनुरूप मनाया जाना चाहिए।

इनपुट: IANS

N

News4Social वायर डेस्क

News4Social का वायर डेस्क समाचार एजेंसियों (IANS आदि) की लाइसेंस-प्राप्त फीड से ताज़ा व प्रामाणिक राष्ट्रीय, राज्य और विषय-आधारित खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर का स्रोत स्पष्ट रूप से श्रेय (credit) के साथ दिया जाता है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →