ईरान-अमेरिका शांति समझौता: राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने इसे क्षेत्र और दुनिया के लिए फायदेमंद बताया
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते को ईरान, पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद बताया है। उनका मानना है कि इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में स्थिरता और…
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते को ईरान, पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद बताया है। उनका मानना है कि इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में स्थिरता और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ने कहा कि इसके बाद अमेरिका और इजरायल क्षेत्र में अराजकता और असुरक्षा नहीं फैला पाएंगे।
तेहरान में एक समारोह के दौरान अपने विचार रखते हुए, जैसा कि राष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट पर बताया गया है, पेजेश्कियन ने मुस्लिम देशों के बीच एकता और सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा करके 'दुश्मनों की साजिशों' को नाकाम किया जा सकता है। ईरान की रक्षा नीति पर उन्होंने स्पष्ट किया, "ईरान ने कभी किसी युद्ध की शुरुआत नहीं की है। हम युद्ध का स्वागत नहीं करते, लेकिन किसी भी हमलावर के खिलाफ मजबूती से खड़े रहेंगे।"
समझौते की पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति
यह समझौता ज्ञापन (एमओयू) 18 जून को ईरान और अमेरिका के बीच हस्ताक्षरित किया गया था, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के सभी मोर्चों पर युद्ध को समाप्त करना था। इस समझौते के तहत, दोनों पक्षों को 60 दिनों के भीतर, यानी 17 अगस्त तक, बातचीत के जरिए एक अंतिम समझौते पर पहुंचना था। हालांकि, पिछले महीने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के कारण इन वार्ताओं का भविष्य अभी अनिश्चित है।
इस तनावपूर्ण माहौल की शुरुआत 28 फरवरी को हुई जब इजरायल और अमेरिका ने मिलकर तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी कार्रवाई की और होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण कड़ा कर दिया।
अन्य हालिया घटनाक्रम
इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों को प्रभावित करने और ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध को लंबा खींचने के लिए 'बड़े स्तर पर' प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एक अलग बयान में बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने दक्षिण-पूर्वी सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में अमेरिका-इजरायल से जुड़े एक 'आतंकी' समूह पर बड़ी कार्रवाई की है। इस ऑपरेशन में एक सदस्य मारा गया और छह अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया।
इनपुट: IANS



