ईरान-अमेरिका तनाव: तेहरान बोला - दबाव काम नहीं करेगा, अमेरिका समझे तो कूटनीति संभव
ईरान और अमेरिका के बीच अटकी बातचीत को लेकर तेहरान ने एक बार फिर अपना रुख साफ़ किया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर वाशिंगटन यह समझ ले कि दबाव की रणनीति कारगर नहीं है, तो…
ईरान और अमेरिका के बीच अटकी बातचीत को लेकर तेहरान ने एक बार फिर अपना रुख साफ़ किया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर वाशिंगटन यह समझ ले कि दबाव की रणनीति कारगर नहीं है, तो दोनों देशों के बीच कूटनीति की वापसी संभव है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह टिप्पणी उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के साथ तेहरान में हुई एक बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर की।
विदेश मंत्री अराघची ने ज़ोर देकर कहा, "कूटनीति को फिर से पटरी पर लाना असंभव नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिका एक सरल तथ्य को समझे।" उन्होंने अमेरिका से भरोसा बनाने, सम्मानजनक बातचीत करने, ईरान के अधिकारों को मान्यता देने और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की भी अपील की।
बातचीत की समय-सीमा और बढ़ता तनाव
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से 18 जून को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों में बातचीत होनी थी, जिसकी समय-सीमा 17 अगस्त को समाप्त हो चुकी है। हालांकि, पिछले महीने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के कारण यह बातचीत रुकी हुई है।
इसी महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सहायता देने वाले किसी भी देश के खिलाफ 'अब तक की सबसे कठोर आर्थिक कार्रवाई' की चेतावनी दी थी। उन्होंने इसे 'आर्थिक डी-डे' और 'अभूतपूर्व स्तर पर आर्थिक युद्ध' करार दिया था।
ईरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिका के इस सख्त रुख के जवाब में ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने गुरुवार को कहा कि अगर अमेरिका ने कोई "दुर्भावनापूर्ण" कदम उठाया तो ईरान पश्चिम एशिया में उसके सैन्य और आर्थिक हितों को निशाना बनाकर कड़ा जवाब देगा। फार्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने यह बात कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी के साथ बैठक में कही।
रेजाई ने वाशिंगटन पर कूटनीति और बातचीत को बार-बार धोखा देने का आरोप लगाते हुए तेहरान के अविश्वास को उजागर किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य तभी खोलेगा जब वाशिंगटन तेहरان की शर्तों को पूरा करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाएगा। इस बैठक में कतर के प्रधानमंत्री ने क्षेत्रीय जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए ईरान के साथ सहयोग जारी रखने की अपने देश की प्रतिबद्धता दोहराई।
इनपुट: IANS



