रविवार, 20 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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परमाणु अप्रसार संधि पर ईरान का रुख़ साफ नहीं, कहा- अमेरिका के रवैये पर निर्भर करेगा फैसला

ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने या न निकलने पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर तेहरान का अगला कदम…

परमाणु अप्रसार संधि पर ईरान का रुख़ साफ नहीं, कहा- अमेरिका के रवैये पर निर्भर करेगा फैसला
(फोटो: IANS)

ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकलने या न निकलने पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर तेहरान का अगला कदम पूरी तरह से अमेरिका के भविष्य के रवैये पर निर्भर करेगा।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने शनिवार को एक साक्षात्कार में यह जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अब भी अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के उस धार्मिक फतवे का पालन कर रहा है, जिसमें परमाणु हथियार बनाने पर पाबंदी लगाई गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा, "हमें नहीं पता कि भविष्य में क्या होगा।"

बातचीत की शर्तें और अमेरिका की तैयारी

रेजाई ने कहा कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका के हित में यही है कि वह ईरान की शर्तों को स्वीकार कर ले। इन शर्तों में सभी मोर्चों पर लड़ाई खत्म करना, ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को जारी करना और ईरान के खिलाफ लगी समुद्री नाकेबंदी को हटाना शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है और अमेरिका से वार्ता शुरू करने की शर्तें उन्हें बता दी गई हैं।

वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र में अपनी कूटनीतिक बैठकों के दौरान ईरान की परमाणु गतिविधियों को एक प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं। वह न्यूयॉर्क में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के नेताओं से मुलाकात करेंगे, जहाँ ईरान चर्चा का एक बड़ा विषय होगा। अमेरिकी अधिकारियों ने तेहरान के साथ व्यापार करने वाली संस्थाओं को और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि ट्रंप या कोई अन्य अमेरिकी प्रतिनिधि ईरानी अधिकारियों से मिलेंगे या नहीं।

तनाव की पृष्ठभूमि

यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है। 28 फरवरी को इज़राइल और अमेरिका ने तेहरान समेत ईरान के अन्य शहरों पर हमले किए थे। जवाब में ईरान ने इज़राइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी।

इसके बाद, 18 जून को दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर युद्धविराम के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इस एमओयू के तहत अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिनों के भीतर बातचीत होनी थी, जिसकी समय सीमा 17 अगस्त को समाप्त हो चुकी है। हाल के तनाव को देखते हुए इन वार्ताओं का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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