होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान की संसदीय समिति ने नई सुरक्षा कार्य योजना को दी मंज़ूरी
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य झड़पों के बीच, ईरान की संसद की एक अहम समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र के लिए एक नई सुरक्षा योजना को हरी झंडी दे दी है। समाचार एजेंसी…
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य झड़पों के बीच, ईरान की संसद की एक अहम समिति ने होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र के लिए एक नई सुरक्षा योजना को हरी झंडी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रणनीतिक कार्य योजना का उद्देश्य क्षेत्र में "सुरक्षा और टिकाऊ प्रगति सुनिश्चित करना" है।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने बताया कि संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने इस योजना पर चर्चा के बाद इसे बिना किसी विरोध के अपनी मंज़ूरी दे दी। समिति के प्रवक्ता हसन कशकावी के हवाले से कहा गया कि सांसदों ने योजना के सामान्य ढांचे को अंतिम रूप देने से पहले देश की संबंधित संस्थाओं से मिली जानकारी की गहन समीक्षा की थी। यह कानून औपचारिक रूप से 13 जुलाई को संसद में पेश किया गया था।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव और बातचीत का भविष्य
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच जून में हुआ एक समझौता अधर में लटका हुआ है। दोनों देशों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत 60 दिनों में अंतिम समझौते पर बातचीत होनी थी। हालांकि, इलाके में हाल में बढ़े तनाव ने इन वार्ताओं के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।
जुलाई में, अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर कई हमले किए, जिन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों का जवाब बताया गया। इसके जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।
पृष्ठभूमि और कूटनीतिक प्रयास
ईरान ने इसी साल 28 फरवरी को अपने क्षेत्र पर संयुक्त हमलों के बाद इज़रायल और अमेरिका से जुड़े जहाजों के लिए जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुज़रने पर रोक लगा दी थी। इन सबके बीच, ईरान और ओमान पिछले कुछ हफ़्तों से जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही के लिए एक नया रास्ता बनाने पर भी बातचीत कर रहे हैं।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि फ़िलहाल अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा, "जब तक अमेरिका 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' का उल्लंघन बंद नहीं करता और उसकी भरपाई नहीं करता, तब तक बातचीत फिर से शुरू नहीं हो सकती।"
इनपुट: IANS



