भारतीय टैबलेट बाज़ार में महंगे डिवाइसों का दबदबा, 89% हिस्सेदारी के साथ बिक्री 74% बढ़ी
भारत में टैबलेट खरीदने वालों की पसंद अब तेज़ी से बदल रही है और लोग सस्ते मॉडलों की जगह ज़्यादा बेहतर परफॉर्मेंस वाले महंगे डिवाइसों को तरजीह दे रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस…
भारत में टैबलेट खरीदने वालों की पसंद अब तेज़ी से बदल रही है और लोग सस्ते मॉडलों की जगह ज़्यादा बेहतर परफॉर्मेंस वाले महंगे डिवाइसों को तरजीह दे रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल की पहली छमाही (जनवरी-जून 2026) में भारत का टैबलेट बाज़ार सालाना आधार पर 15% बढ़ा, जिसका मुख्य कारण प्रीमियम सेगमेंट में हुई ज़बरदस्त बढ़ोतरी है।
साइबरमीडिया रिसर्च (CMR) के आँकड़ों से पता चलता है कि 20,000 रुपये से ज़्यादा कीमत वाले प्रीमियम टैबलेट्स की बिक्री में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 74% का उछाल आया। इसके साथ ही, अब कुल बाज़ार में इन प्रीमियम डिवाइसों की हिस्सेदारी बढ़कर 89% हो गई है। यह रुझान साफ़ बताता है कि उपभोक्ता, शिक्षा और कॉर्पोरेट जगत में बेहतर परफॉर्मेंस, बड़ी स्क्रीन और ज़्यादा उत्पादकता वाले टैबलेट्स की माँग लगातार बढ़ रही है।
डिवाइसों के स्पेसिफिकेशन में बड़ा बदलाव
रिपोर्ट के मुताबिक, टैबलेट खरीदने वाले अब बड़े डिस्प्ले और ज़्यादा मेमोरी वाले मॉडलों को पसंद कर रहे हैं। कुल बिके टैबलेट्स में से लगभग 91% मॉडल 10 इंच से बड़ी स्क्रीन वाले थे। वहीं, परफॉर्मेंस के मामले में भी खरीदारों की प्राथमिकताएँ बदली हैं। 6GB रैम वाले टैबलेट्स की बिक्री 73% बढ़ी, जबकि 12GB रैम वाले वेरिएंट्स की बिक्री में 422% की असाधारण वृद्धि दर्ज की गई।
कनेक्टिविटी के मामले में वाई-फाई टैबलेट्स का शिपमेंट 30% और 5G टैबलेट्स का 8% बढ़ा, लेकिन 4G टैबलेट्स की शिपमेंट में 19% की गिरावट देखी गई। प्रीमियम सेगमेंट में एप्पल का दबदबा कायम है, जहाँ अकेले एप्पल आईपैड 11 सीरीज़ की हिस्सेदारी करीब 23% रही।
क्या कहते हैं बाज़ार विशेषज्ञ?
CMR की वरिष्ठ विश्लेषक मेनका कुमारी ने कहा, "भारतीय टैबलेट बाज़ार तेज़ी से परिपक्व हो रहा है और लोग बेहतर स्पेसिफिकेशन वाले डिवाइसों की ओर जा रहे हैं। बड़ी स्क्रीन, ज़्यादा रैम और मज़बूत वाई-फाई की प्राथमिकता के साथ-साथ कंपोनेंट की बढ़ती लागत औसत बिक्री कीमतों को ऊपर ले जा रही है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही बिक्री की कुल रफ़्तार धीमी हो रही है, लेकिन कंटेंट बनाने, शिक्षा और कॉर्पोरेट कामों के लिए टैबलेट आज भी एक ज़रूरी डिवाइस बने हुए हैं।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि पूरे कैलेंडर वर्ष 2026 में टैबलेट बाज़ार में 10 से 12 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। इसकी वजह कलपुर्जों की बढ़ती लागत, मेमोरी की आपूर्ति में कमी और संस्थागत खरीद में अनिश्चितता को बताया गया है, जिससे साल की दूसरी छमाही में बाज़ार पर दबाव पड़ सकता है।
इनपुट: IANS



