अगले 5 साल में 7.3% की औसत रफ़्तार से बढ़ सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था: DBS बैंक की रिपोर्ट
डीबीएस बैंक की एक अर्थशास्त्री के अनुसार, मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह (Capital Inflow) के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027 तक औसतन 7.3% की दर से विकास कर सकती है। समाचार एजेंसी IANS की एक…
डीबीएस बैंक की एक अर्थशास्त्री के अनुसार, मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह (Capital Inflow) के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027 तक औसतन 7.3% की दर से विकास कर सकती है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट में मंगलवार को यह जानकारी दी गई। यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत ने 7.8% की प्रभावशाली विकास दर दर्ज की है।
इस मजबूत शुरुआत की मुख्य वजहें घरेलू मांग में तेज़ी, खपत में बढ़ोत्तरी, सरकारी पूंजीगत व्यय और विनिर्माण क्षेत्र का अच्छा प्रदर्शन रहीं। जीएसटी कलेक्शन, ई-वे बिल और बिजली की मांग जैसे कई उच्च-आवृत्ति संकेतक (High-Frequency Indicators) भी लगातार मजबूत बने हुए हैं।
विकास की रफ़्तार और महंगाई की चुनौती
डीबीएस बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राधिका राव ने कहा कि इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में विकास की गति कुछ धीमी पड़ सकती है। उन्होंने इसके लिए मुश्किल वित्तीय हालात, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और बड़े आधार प्रभाव (Base Effect) को वजह बताया है।
रिपोर्ट में महंगाई को एक बड़ी चुनौती के तौर पर देखा गया है। अगस्त में महंगाई दर बढ़कर 4.8% हो गई थी। इसका कारण चीनी, दूध, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ और खाने के तेल जैसी चीज़ों के साथ-साथ ऊर्जा और परिवहन लागत में हुई बढ़ोतरी थी। राव के मुताबिक, औसत से कम मानसून और अल-नीनो के बढ़ते खतरे का असर आने वाली फसलों पर पड़ सकता है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
मौद्रिक नीति का फोकस महंगाई पर रहेगा
राधिका राव का अनुमान है कि इन परिस्थितियों के चलते वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में हेडलाइन मुद्रास्फीति 5% के स्तर से ऊपर बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि इस वजह से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति का मुख्य ध्यान महंगाई से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने पर ही केंद्रित रहेगा।
इसके अलावा, देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ने से भारत का बाहरी बफर (External Buffer) तो मजबूत हुआ है, लेकिन इसने सिस्टम में अतिरिक्त नकदी (Liquidity) के प्रबंधन की एक नई चुनौती भी खड़ी कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को संभालने के लिए वीआरआरआर (VRRR) और ओपन-मार्केट ऑपरेशन जैसे उपायों की ज़रूरत पड़ सकती है।
डीबीएस को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027 में चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) जीडीपी का लगभग 1.1% रहेगा, जबकि मजबूत पूंजी प्रवाह के कारण भुगतान संतुलन (Balance of Payments) अधिशेष में रह सकता है।
इनपुट: IANS



