शनिवार, 7 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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त्योहारों ने दी बाज़ार को नई जान: दिवाली पर देश में 7 लाख करोड़ रुपये की बिक्री का अनुमान, दिल्ली का कारोबार 1 लाख करोड़ पार

इस साल दिवाली और धनतेरस के त्योहारों ने देशभर के बाजारों में ज़बरदस्त रौनक ला दी है। व्यापारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में कुल बिक्री…

त्योहारों ने दी बाज़ार को नई जान: दिवाली पर देश में 7 लाख करोड़ रुपये की बिक्री का अनुमान, दिल्ली का कारोबार 1 लाख करोड़ पार
(फोटो: IANS)

इस साल दिवाली और धनतेरस के त्योहारों ने देशभर के बाजारों में ज़बरदस्त रौनक ला दी है। व्यापारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में कुल बिक्री 7 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर को पार करने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले राजधानी दिल्ली में ही त्योहारों से जुड़ा कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये का आँकड़ा पार कर चुका है।

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कैट के महासचिव और सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि शनिवार तक मिले आँकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर बिक्री 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा, "बाजारों में लगातार बढ़ती ग्राहकों की भीड़ और मजबूत खरीदारी रुझान को देखते हुए कुल कारोबार 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है।"

हर सेक्टर में दिखी खरीदारी की बहार

इस त्योहारी सीजन में लगभग सभी प्रमुख श्रेणियों में ग्राहकों की मज़बूत मांग दर्ज की गई। सोना, चांदी और आभूषणों से लेकर घरेलू उपकरणों तक की खूब बिक्री हुई। मोबाइल फोन, एलईडी टेलीविज़न, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की बिक्री में भी काफ़ी तेज़ी देखी गई। कपड़ों और फैशन के बाज़ार में भी साड़ी, सूट, कुर्ते और रेडीमेड परिधानों की ज़बरदस्त मांग रही। इसके अलावा, मिट्टी के दीये, पूजा सामग्री और मिठाइयों जैसे पारंपरिक सामानों की भी खूब खरीदारी हुई।

वाहन उद्योग में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला, जहाँ कारों, दोपहिया और वाणिज्यिक वाहनों की अच्छी बिक्री हुई। साथ ही, खादी, हथकरघा, हस्तशिल्प और महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को भी लोगों ने हाथों-हाथ लिया।

'वोकल फॉर लोकल' का दिखा असर

प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार, इस साल के बाज़ारों में एक बड़ा बदलाव यह दिखा कि उपभोक्ता भारतीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' की अपील का असर लोगों की खरीदारी की आदतों में साफ़ दिखाई दे रहा है। इस रुझान से भारतीय कारीगरों, निर्माताओं और स्थानीय उद्यमियों को मज़बूत समर्थन मिल रहा है, जिससे घरेलू उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।

व्यापारियों को मिली बड़ी राहत

इस विशाल कारोबार का लाभ सिर्फ बड़े प्रतिष्ठानों को ही नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों, दिहाड़ी मजदूरों और सूक्ष्म उद्योगों से जुड़े लाखों लोगों को भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मिला है। खंडेलवाल ने यह भी बताया कि बाजारों की अभूतपूर्व भीड़ ने उन कारोबारी नुकसानों की भरपाई का मौका दिया है, जो हाल के दिनों में राजनीतिक रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के कारण हुए थे। उन्होंने कहा कि त्योहारों की खरीदारी ने कारोबारियों को बड़ी राहत दी है।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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