रविवार, 18 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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रूसी तेल पर टैरिफ से छूट: ट्रंप के फैसले पर अमेरिकी संसद में पक्ष-विपक्ष एकजुट, कड़ी आलोचना

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल खरीदने वाले देशों को नए शुल्कों और प्रतिबंधों से अस्थायी छूट देने के फैसले पर अमेरिकी कांग्रेस में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस…

रूसी तेल पर टैरिफ से छूट: ट्रंप के फैसले पर अमेरिकी संसद में पक्ष-विपक्ष एकजुट, कड़ी आलोचना
(फोटो: IANS)

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल खरीदने वाले देशों को नए शुल्कों और प्रतिबंधों से अस्थायी छूट देने के फैसले पर अमेरिकी कांग्रेस में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस मुद्दे पर डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ-साथ कुछ वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता भी खुलकर ट्रंप की आलोचना कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के इस कदम को यूक्रेन के प्रति अमेरिकी समर्थन को कमजोर करने और रूस के प्रति नरम रुख अपनाने के तौर पर देखा जा रहा है।

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ट्रंप ने 16 अक्टूबर को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें रूसी तेल और गैस के सबसे बड़े खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। हालांकि, उसी आदेश में इन शुल्कों को अस्थायी रूप से माफ करने की बात भी कही गई, जिससे भारत जैसे देशों को राहत मिली जो रूसी कच्चे तेल के प्रमुख आयातक हैं।

सांसदों ने दिवंगत लिंडसे ग्राहम को किया याद

इस फैसले की आलोचना में कई सांसदों ने दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम का जिक्र किया, जिनके नाम पर रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक विधेयक का नाम रखा गया था। टेक्सास से रिपब्लिकन सीनेटर और 'सीनेट इंडिया कॉकस' के सह-संस्थापक जॉन कॉर्निन ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट साझा करते हुए लिखा, "लिंडसे यह देखकर हैरान और दुखी होते।"

इसी तरह, सीनेट के डेमोक्रेटिक नेता डिक डर्बिन ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर क्रेमलिन के सामने झुकने का रास्ता चुना है। लिंडसे ग्राहम, जॉन मैक्केन और रोनाल्ड रीगन यह देखकर दुखी हो रहे होंगे।"

फैसले के खिलाफ मुखर हुए डेमोक्रेट्स

भारतीय मूल के कई अमेरिकी सांसदों ने भी इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट सांसद अमी बेरा ने कहा कि यह फैसला साफ करता है कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन का साथ छोड़ रहा है। वर्जीनिया के सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने कहा, "ट्रंप वही कर रहे हैं जिसकी हमने चेतावनी दी थी। वह कांग्रेस के अधिकार को कमजोर कर रहे हैं, यूक्रेन का साथ छोड़ रहे हैं और पुतिन को जवाबदेही से बचने का मौका दे रहे हैं।"

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के शीर्ष डेमोक्रेट ग्रेगरी मीक्स ने ट्रंप पर पुतिन के प्रति लगातार नरम रवैया अपनाने का आरोप लगाया और उन्हें 'नेविल चेम्बरलेन तुष्टिकरण पुरस्कार' देने का तंज कसा। वहीं, मैसाचुसेट्स के सांसद जिम मैकगवर्न ने सवाल उठाया, "आखिर पुतिन ने ट्रंप से इसके बदले क्या वादा किया है?"

एक संगठन ने किया फैसले का समर्थन

हालांकि, सभी प्रतिक्रियाएं आलोचनात्मक नहीं थीं। अमेरिका स्थित संगठन 'फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज' (FIIDS) ने ट्रंप के इस फैसले को एक व्यावहारिक कदम बताते हुए धन्यवाद दिया। संगठन का कहना है कि यूक्रेन और ईरान संघर्षों के कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं और सर्दियां करीब हैं, ऐसे में सस्ती ऊर्जा और कूटनीतिक समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए।

इनपुट: IANS

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