संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा जवाब: 'पक्षपातपूर्ण' रिपोर्ट पर UN दूत को लगाई फटकार, पाकिस्तान को भी सुनाई खरी-खरी
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता पर एक विशेष दूत (Special Rapporteur) की रिपोर्ट को 'पक्षपातपूर्ण' बताते हुए उसकी कड़ी आलोचना की है। भारत ने कहा कि रिपोर्ट आतंकवाद की गंभीरता को…
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता पर एक विशेष दूत (Special Rapporteur) की रिपोर्ट को 'पक्षपातपूर्ण' बताते हुए उसकी कड़ी आलोचना की है। भारत ने कहा कि रिपोर्ट आतंकवाद की गंभीरता को नजरअंदाज करती है और केवल विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) को निशाना बनाती है, जबकि विकसित देशों की बड़ी घटनाओं को छोड़ देती है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान को भी धार्मिक स्वतंत्रता पर उपदेश न देने की नसीहत दी है।
यह प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र महासभा की मानवीय मामलों से जुड़ी तीसरी समिति में भारत के मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने दी। वह धार्मिक या आस्था की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत नजीला घनेया की रिपोर्ट पर बोल रही थीं। इस रिपोर्ट में भारत में अंतिम संस्कार और दफनाने से जुड़े कुछ मामलों का उल्लेख किया गया था।
रिपोर्ट में भारत पर क्या आरोप थे?
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून की प्रोफेसर नजीला घनेया की रिपोर्ट का विषय 'असाधारण परिस्थितियों में धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार का अधिकार' था। रिपोर्ट में दो मुख्य दावे किए गए थे:
- कश्मीर में सुरक्षा अभियानों में मारे गए कुछ लोगों के शव उनके परिवारों को नहीं सौंपे गए और उन्हें दूर-दराज के इलाकों में दफना दिया गया।
- नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए कुछ लोगों के अंतिम संस्कार पर अधिकारियों ने 'कानून-व्यवस्था' का हवाला देते हुए प्रतिबंध लगाए थे।
भारत ने रिपोर्ट को क्यों बताया पक्षपातपूर्ण?
भाविका मंगलानंदन ने कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि रिपोर्ट में आतंकवादियों के अधिकारों की पुरजोर वकालत की गई है, लेकिन उनके पीड़ितों के लिए वैसी चिंता नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा, "आतंकवादी जीवन के सबसे बुनियादी अधिकार का उल्लंघन करते हैं।"
भारत ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि रिपोर्ट ने कोविड-19 महामारी के दौरान दफनाने से जुड़ी कथित भेदभावपूर्ण प्रथाओं का जिक्र सिर्फ विकासशील देशों के संदर्भ में किया। मंगलानंदन ने सवाल उठाया, "विकसित देशों में हुई ऐसी ही दुखद घटनाओं का जिक्र न करके रिपोर्ट को क्या हासिल होता है?" उन्होंने न्यूयॉर्क शहर का उदाहरण दिया, जहां महामारी के दौरान हजारों मृतकों को एक अलग द्वीप पर सामूहिक कब्रों में दफनाया गया था, लेकिन रिपोर्ट में इसका कोई उल्लेख नहीं है।
पाकिस्तान को भारत का करारा जवाब
बैठक के दौरान पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए भारत ने इसे बेहद विडंबनापूर्ण बताया। मंगलानंदन ने कहा, "एक ऐसा देश, जिसने 1999 के कारगिल युद्ध में मारे गए अपने सैनिकों के शव तक स्वीकार नहीं किए थे, वह आज धर्म और दफनाने के अधिकारों पर बोल रहा है।" उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय सेना ने उन पाकिस्तानी सैनिकों को सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफनाया था।
भारत ने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह अपने अवैध कब्जे वाले कश्मीर क्षेत्र और लगातार कम हो रहे अपने अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करे। भारत ने साफ किया कि जो देश अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं कर सकता, उसे भारत को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।
इनपुट: IANS



