बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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सैम पित्रोदा: AI बनाने में भारतीय आगे, पर देश के तौर पर भारत पिछड़ा, नीति और दिशा की कमी

भारत में दूरसंचार क्रांति के सूत्रधार माने जाने वाले वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भले ही दुनियाभर में AI…

सैम पित्रोदा: AI बनाने में भारतीय आगे, पर देश के तौर पर भारत पिछड़ा, नीति और दिशा की कमी
(फोटो: IANS)

भारत में दूरसंचार क्रांति के सूत्रधार माने जाने वाले वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर देश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भले ही दुनियाभर में AI तकनीक को आकार देने में भारतीय विशेषज्ञों की अहम भूमिका हो, लेकिन एक देश के तौर पर भारत इस क्षेत्र में काफी पीछे है। समाचार एजेंसी IANS को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के पास AI पर न तो कोई स्पष्ट नीति है और न ही कोई दिशा।

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पित्रोदा ने कहा, "मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है, लेकिन AI के मामले में भारत अच्छी स्थिति में नहीं है। हालांकि भारतीय लोग AI के क्षेत्र में अच्छी स्थिति में हैं। ये दोनों अलग बातें हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि AI की असली सफलता इस बात से मापी जानी चाहिए कि वह आम लोगों की समस्याओं को कितना हल करती है, न कि सिर्फ पश्चिमी देशों या वित्तीय बाजारों की जरूरतों को पूरा करने से।

असली मुद्दों पर हो AI का इस्तेमाल

पित्रोदा ने भारत की जमीनी समस्याओं को हल करने के लिए AI के इस्तेमाल की वकालत की। उन्होंने अदालतों में लंबित करोड़ों मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि AI इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। उन्होंने सवाल किया, "क्या मैं AI का उपयोग अपने अदालतों के मामलों को निपटाने के लिए कर सकता हूं?" उनके अनुसार, AI का फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों पर होना चाहिए।

उन्होंने कहा, "सवाल यह है कि AI हमारी शिक्षा को कैसे बेहतर बनाएगा? हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था को कैसे मजबूत करेगा? क्या AI स्वास्थ्य सेवाओं की लागत कम कर सकता है? हमारे किसानों की मदद कैसे कर सकता है? यही असली मुद्दे हैं।"

'स्वदेशी समाधान, वैश्विक उपयोग'

इस विचार को खारिज करते हुए कि भारत के लिए बनाई गई तकनीक वैश्विक स्तर पर उपयोगी नहीं होगी, पित्रोदा ने कहा कि आज हर उत्पाद वैश्विक है। उन्होंने कहा कि जब आप भारत के लिए कुछ बनाते हैं, तो वह दुनिया के लिए भी उपयोगी बन सकता है। उन्होंने अदालतों में लंबित मामलों का उदाहरण दोहराते हुए कहा कि लैटिन अमेरिका जैसे कई विकासशील देशों में भी ऐसी ही चुनौतियां हैं।

करीब 45 साल पहले C-DOT और C-DAC की स्थापना को याद करते हुए उन्होंने स्वदेशी तकनीकी विकास का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन्हीं प्रयासों से वह मानव संसाधन तैयार हुआ, जिसने बाद में भारत के आईटी क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाई और लाखों परिवारों को गरीबी से बाहर निकाला।

गरीबों की समस्याओं पर हो ध्यान

सैम पित्रोदा ने अपना पुराना तर्क दोहराते हुए कहा कि दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली लोग अमीरों की समस्याएं हल करने में लगे हैं, जबकि गरीबों की समस्याओं पर जरूरी ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी प्रतिभा का उपयोग गरीब और विकासशील देशों की समस्याओं के समाधान के लिए करना चाहिए, न कि केवल अमीर देशों की व्यावसायिक जरूरतों के लिए। पित्रोदा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में अहम नीतिगत भूमिकाएं निभा चुके हैं।

इनपुट: IANS

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