लखनऊ कोर्ट परिसर में अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, याचिका खारिज कर गिराने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ कोर्ट परिसर में वकीलों द्वारा किए गए अनधिकृत निर्माणों को गिराने का रास्ता साफ कर दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ की याचिका पर विचार…
सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ कोर्ट परिसर में वकीलों द्वारा किए गए अनधिकृत निर्माणों को गिराने का रास्ता साफ कर दिया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में शीर्ष अदालत ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ की याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए अवैध ढांचों को शांतिपूर्वक खाली करने का निर्देश दिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही उस कार्यवाही के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें सार्वजनिक रास्तों और उपयोगी जमीन पर बने अवैध चैंबरों और दुकानों को हटाने का आदेश दिया गया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने वकीलों की उन दलीलों को खारिज कर दिया, जिनमें वैकल्पिक जगह दिए जाने या मध्यस्थता की मांग की गई थी। बेंच ने स्पष्ट किया कि एसोसिएशन में पद पर होने से किसी को भी अवैध कब्जा बनाए रखने का अधिकार नहीं मिल जाता।
“सड़कें बाधित, निर्माण तोड़ने ही होंगे”
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने अपनी व्यक्तिगत जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने खुद इन निर्माणों को देखा है। उन्होंने टिप्पणी की, “आप मुख्य सड़क पर कब्जा करते हैं, कोर्ट परिसर के अंदर खुली जगह पर कब्जा करते हैं, अनधिकृत निर्माण करते हैं और फिर कहते हैं कि मैं एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया हूं... मुझे वहां बने रहने का अधिकार है, ऐसा नहीं हो सकता।”
पीठ ने जोर देकर कहा कि इन ढांचों के कारण सड़कें और ट्रैफिक बुरी तरह बाधित हुआ है, इसलिए इन्हें हटाना ही होगा। जस्टिस नाथ ने कहा, “सभी निर्माण तोड़े जाने हैं। मैंने खुद देखा है जब मैं वहां दो साल तक सीनियर जज था। मुझे पता है कि किस तरह के निर्माण हुए हैं, सड़कों में कैसे बाधा डाली गई है, ट्रैफिक पूरी तरह से बाधित है। तोड़फोड़ तो होनी ही है।” जब वकीलों की ओर से वैकल्पिक जगह का सुझाव आया, तो कोर्ट ने कहा कि वे सरकार से अनुरोध करें या खुद जमीन खरीदें।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही का मामला
यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें परिसर के 72 अतिक्रमणों की पहचान की गई थी। हाईकोर्ट के सामने यह बात रखी गई थी कि वकीलों के विरोध और बाधा डालने के कारण पहले चरण में सिर्फ 14 निर्माण ही हटाए जा सके थे। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट के निर्देशों पर 100 से ज्यादा अवैध चैंबर तोड़े गए थे।
4 अगस्त के अपने आदेश में हाईकोर्ट ने बाकी अतिक्रमणकारियों को निर्माण खाली करने या अपने कब्जे का वैध दावा पेश करने का एक और मौका दिया था। ऐसा न करने पर अवैध ढांचों को गिराने की कार्रवाई रविवार को करने का निर्देश था, ताकि न्यायिक कामकाज प्रभावित न हो। हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई के लिए लखनऊ के पुलिस कमिश्नर, जिला मजिस्ट्रेट और म्युनिसिपल कमिश्नर को समन्वय बनाने और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया था।
इनपुट: IANS



