शेख हसीना का बांग्लादेश लौटने का ऐलान: 'यातना या मौत का डर नहीं, वापस जाऊंगी'
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह सभी खतरों के बावजूद अपने देश वापस लौटेंगी, भले ही वहां उन्हें गिरफ्तारी, यातना या मौत का सामना क्यों न करना पड़े। समाचार एजेंसी IANS के…
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह सभी खतरों के बावजूद अपने देश वापस लौटेंगी, भले ही वहां उन्हें गिरफ्तारी, यातना या मौत का सामना क्यों न करना पड़े। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, वाशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को वर्चुअली संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उनके समर्थक और देश के आम लोग मुश्किलों में हैं, तो वह विदेश में नहीं रह सकतीं।
अगस्त 2024 में अपनी सरकार गिरने के बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था, जिसके बाद से वह भारत में रह रही हैं। उन्होंने इस मुश्किल समय में शरण और सहयोग देने के लिए भारत सरकार और यहां के लोगों का आभार जताया। हसीना ने कहा, "मैं भारत सरकार, यहां के लोगों और सभी दलों की आभारी हूं। उन्होंने मुझे उसी तरह अपनाया जैसे 1975 में किया था।" उन्होंने 1975 की उस त्रासदी को भी याद किया जब उनके परिवार के अधिकांश सदस्यों की हत्या कर दी गई थी।
अपने समर्थकों के साथ खड़े रहने की जिम्मेदारी
शेख हसीना ने कहा कि उन्हें पता है कि बांग्लादेश लौटने पर उन्हें जेल या हिंसा का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन एक राजनीतिक नेता होने के नाते यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह अपने समर्थकों के साथ खड़ी रहें। उन्होंने कहा, "वापसी कितनी भी जोखिम भरी क्यों न हो, मुझे इसकी परवाह नहीं है। मुझे वापस जाना ही होगा।" हसीना ने अपने राजनीतिक जीवन के पिछले अनुभवों का भी जिक्र किया, जब वह जान के खतरे के बावजूद देश लौटी थीं, जिसमें 1981 और 2007 के राजनीतिक संकट शामिल हैं।
अमेरिका और मौजूदा सरकार को संदेश
पूर्व प्रधानमंत्री ने अमेरिका से अपील की कि वह किसी एक नेता या दल का नहीं, बल्कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं और निष्पक्ष चुनावों का समर्थन करे। उन्होंने कहा, "मेरा संदेश अमेरिका के लिए यह है कि वह शेख हसीना या किसी दूसरे नेता को न चुने, बल्कि लोकतंत्र को चुने।" हसीना ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश का मौजूदा नेतृत्व उनके और आवामी लीग के नेताओं के खिलाफ कानूनी मामलों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए कर रहा है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपों का फैसला निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया से होना चाहिए।
बदला नहीं, मेल-मिलाप की जरूरत
शेख हसीना ने स्वीकार किया कि उनकी सरकार के कामकाज और 2024 के घटनाक्रमों को लेकर कई गंभीर सवाल हैं, जिनकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने देश में मेल-मिलाप की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, "जो लोग मेरी सरकार का विरोध करते हैं, वे भी इस देश के नागरिक हैं और उनके अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। बांग्लादेश का भविष्य बदले की भावना नहीं, बल्कि मेल-मिलाप के आधार पर बनना चाहिए।" हालांकि, उन्होंने अपनी वापसी की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय ने बताया कि सही समय आने पर तारीख की घोषणा की जाएगी।
इनपुट: IANS



