हरियाणा: कमजोर वर्गों के लिए घर खरीदना हुआ सस्ता, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस में भारी कटौती
हरियाणा में आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) वर्ग के लोगों के लिए अपना घर खरीदना अब और आसान हो गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक अहम फैसला लिया गया…
हरियाणा में आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) वर्ग के लोगों के लिए अपना घर खरीदना अब और आसान हो गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक अहम फैसला लिया गया, जिसके तहत 'प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0' के तहत मिलने वाले घरों पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस लगभग खत्म कर दी गई है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले से 60 वर्ग मीटर तक के घरों के रजिस्ट्रेशन पर लाभार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का मकसद लेन-देन की लागत और आर्थिक बोझ को कम करना है, ताकि "सभी के लिए आवास" का लक्ष्य तेजी से पूरा हो सके।
घर के रजिस्ट्रेशन पर अब कितना खर्च?
इस विशेष योजना के तहत, EWS वर्ग के लाभार्थियों को अब स्वामित्व हस्तांतरण दस्तावेज़ (कन्वेयंस डीड) पर सिर्फ़ 500 रुपये की मामूली फीस देनी होगी। इसके अलावा, इंडियन स्टाम्प एक्ट, 1899 के तहत लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी को भी घटाकर प्रति डीड 500 रुपये कर दिया गया है।
पहले के नियम: अब तक, राज्य में कन्वेयंस डीड पर 5% स्टाम्प ड्यूटी और 2% अतिरिक्त शुल्क लगता था। हालांकि, अगर घर किसी महिला के नाम पर होता था, तो 2% की छूट मिलती थी। वहीं, रजिस्ट्रेशन फीस अलग-अलग स्लैब के आधार पर ली जाती थी, जिसकी अधिकतम सीमा 50,000 रुपये थी।
उद्योगों के लिए नई नीति और अन्य फैसले
कैबिनेट ने घरों पर राहत देने के साथ-साथ राज्य में निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए हैं। बैठक में 'हरियाणा प्रोग्रेसिव एमएसएमई और एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी 2026' को भी लॉन्च किया गया।
नई औद्योगिक नीति: इस नीति का लक्ष्य राज्य में 55,000 करोड़ रुपये का नया निवेश आकर्षित करना है। यह नीति 'संकल्प पत्र' के वादों को पूरा करने और 'विजन 2047' को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसे छह प्रमुख स्तंभों पर तैयार किया गया है — वित्त, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, निर्यात, सस्टेनेबिलिटी और कौशल विकास। यह पारंपरिक और तेजी से बढ़ते उद्योगों, दोनों को लक्षित सहायता प्रदान करेगी।
इसके अतिरिक्त, कैबिनेट ने 'हरियाणा लोकल ऑडिट बिल, 2026' के मसौदे को भी अपनी मंजूरी दे दी। इस बिल का उद्देश्य राज्य के सभी स्थानीय प्राधिकरणों और संस्थानों के लिए एक प्रभावी और कुशल ऑडिट प्रणाली स्थापित करना है, ताकि स्थानीय फंड के खर्च पर बेहतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
इनपुट: IANS



