बांग्लादेश: बिजली संकट से चरमराई व्यवस्था, अवामी लीग ने सरकार पर साधा निशाना
बांग्लादेश भीषण बिजली संकट से जूझ रहा है, जिससे आम जनजीवन से लेकर अर्थव्यवस्था तक बुरी तरह प्रभावित हुई है। देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी अवामी लीग ने इस स्थिति के लिए सत्ताधारी बीएनपी सरकार और…
बांग्लादेश भीषण बिजली संकट से जूझ रहा है, जिससे आम जनजीवन से लेकर अर्थव्यवस्था तक बुरी तरह प्रभावित हुई है। देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी अवामी लीग ने इस स्थिति के लिए सत्ताधारी बीएनपी सरकार और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने इसे एक प्रणालीगत विफलता करार दिया है जो देश को अभूतपूर्व संकट में धकेल रही है।
अवामी लीग ने दावा किया है कि देश भर में रोजाना 6 से 12 घंटे की बिजली कटौती ने लोगों का जीवन बेहद कठिन बना दिया है। पार्टी ने मौजूदा हालात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "यह संकट अब कोई छोटी-मोटी या कुछ समय की परेशानी नहीं रह गई है, यह पूरी तरह से सिस्टम के फेल होने जैसा है।" पार्टी ने सवाल उठाया कि जब बिजली की भारी कमी ने बड़े शहरों और जिलों, दोनों को ही ठप कर दिया है, तो "क्या कोई सभ्य, विकासशील देश इतने बड़े पैमाने पर संस्थागत विफलता के बावजूद ठीक से काम कर सकता है?"
हर क्षेत्र पर गहरा असर
पार्टी के अनुसार, इस ऊर्जा संकट का प्रभाव सिर्फ निजी जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी पंगु बना रहा है।
शिक्षा और आम जीवन: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में छात्रों को फोन की रोशनी में पढ़ाई करने पर मजबूर होना पड़ रहा है या शाम की पढ़ाई पूरी तरह छोड़नी पड़ रही है। पिछले एक दशक में विकसित हुए डिजिटल लर्निंग उपकरण लंबी बिजली कटौती के दौरान बेकार साबित हो रहे हैं। वहीं, आम लोगों का जीवन "गर्मी, अंधेरे और कमी के हिसाब-किताब तक सिमट कर रह गया है," जिससे नींद, खाना पकाने और रोजमर्रा के कामों में घंटों की बाधा आ रही है।
उद्योग और अर्थव्यवस्था: कारखानों में उत्पादन के घंटे घट गए हैं। कपड़ा इकाइयों में बार-बार काम रुक रहा है और चावल की मिलें बंद पड़ी हैं। खुलना में झींगा पालन करने वाले खेतों में ऑक्सीजन की कमी से स्टॉक बर्बाद होने का खतरा है, जबकि राजशाही और नटोर में सिंचाई पंप ठप हैं। गैस की कमी से पहले से ही जूझ रहे निर्माताओं को अब बिजली की कमी के कारण डीजल की बढ़ती लागत और निर्यात में देरी का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाएं खतरे में
अवामी लीग ने इस बात पर भी जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र अत्यधिक जोखिम में है। क्षेत्रीय अस्पताल और क्लीनिक गहन देखभाल इकाइयों (आईसीयू), सर्जरी और वैक्सीन कोल्ड चेन को बनाए रखने के लिए डीजल जनरेटर पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। पार्टी ने कहा कि ऐसी स्थिति में "लंबे समय तक बिजली कटौती मरीजों की सुरक्षा के लिए सीधा और गंभीर खतरा पैदा करती है।"
पार्टी ने कहा कि 2024 की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद सत्ता में आई बीएनपी सरकार और उससे पहले की अंतरिम सरकार ने एक ऐसे संकट को राष्ट्रीय आपातकाल का रूप लेने दिया, जिसे हल किया जा सकता था। अवामी लीग ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "बत्तियां गुल हो रही हैं। सवाल यह है कि जनता और कितने समय तक इस अंधेरे को बर्दाश्त करेगी।"
इनपुट: IANS



