यूरोप में महंगाई और आवास संकट पर उबाल, फ्रांस के मार्सेय में प्रदर्शनों पर रोक
पूरे यूरोप में महंगाई, आवास की समस्या और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। फ्रांस से लेकर इटली और पुर्तगाल तक, हिंसक झड़पों और बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध…
पूरे यूरोप में महंगाई, आवास की समस्या और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। फ्रांस से लेकर इटली और पुर्तगाल तक, हिंसक झड़पों और बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने महाद्वीप में गहरे होते सामाजिक-आर्थिक विभाजन को उजागर कर दिया है। इसी बीच, समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दक्षिणी फ्रांस के शहर मार्सेय में सोमवार को दोपहर से रात 8 बजे तक सभी प्रकार की सभाओं और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
फ्रांस में शनिवार को हुए देशव्यापी प्रदर्शनों में करीब 5,50,000 लोग शामिल हुए, जिनमें किसान, ट्रेड यूनियन सदस्य, जलवायु कार्यकर्ता और छात्र थे। वे ईंधन की बढ़ती कीमतों, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। ये प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए। फ्रांसीसी गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन झड़पों में 997 पुलिस अधिकारी और सुरक्षाकर्मी घायल हुए, जिनमें से सात की हालत गंभीर है। इसके अलावा, पूरे देश में 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
राष्ट्रपति मैक्रों का कड़ा रुख
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 17 अक्टूबर को हुई हिंसा, लूटपाट और उपद्रव के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का संकल्प लिया है। उन्होंने सोशल प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि फ्रांस में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। मैक्रों ने लिखा, "जिन लोगों ने तोड़फोड़ की है, सरकारी कार्यालयों और व्यवसायों पर हमले किए हैं, और यहां तक कि हमारे टाउन हॉल में लूटपाट भी की। उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन पर मुकदमा चलाया जाएगा और सजा भी दी जाएगी।"
इटली से पुर्तगाल तक विरोध की आग
विरोध प्रदर्शनों की यह लहर सिर्फ फ्रांस तक सीमित नहीं है। उत्तरी इटली के मिलान में भी जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जहां काले कपड़े पहने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया। इतालवी समाचार एजेंसी ANSA के अनुसार, इस झड़प में चार अधिकारी और 20 प्रदर्शनकारी घायल हुए, जबकि लगभग 50 लोगों को हिरासत में लिया गया। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस अराजकता की निंदा करते हुए कहा, "प्रदर्शन करना एक अधिकार है, लेकिन हमारे शहरों में आग लगाना नहीं।"
उधर, बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में भी छात्र शिक्षा सुधारों और बढ़ती लागत के विरोध में सड़कों पर उतरे, जहां उनकी पुलिस से झड़पें हुईं। पुर्तगाल के लिस्बन, पोर्टो और कोइम्ब्रा जैसे शहरों में भी हजारों लोगों ने किफायती आवास की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने लिस्बन के मुख्य चौक पर तंबू लगाकर रियल एस्टेट में मुनाफाखोरी के खिलाफ कानून बनाने की मांग की।
इनपुट: IANS



