न्यूयॉर्क में जुटे 30 देशों के धर्मगुरु, नफ़रत और हिंसा के खिलाफ़ एकता का संकल्प
दुनिया के 30 देशों के 200 से अधिक धार्मिक प्रतिनिधियों ने न्यूयॉर्क में एक मंच पर आकर धर्म के नाम पर फैलाई जाने वाली नफ़रत को अस्वीकार करने का संकल्प लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस…
दुनिया के 30 देशों के 200 से अधिक धार्मिक प्रतिनिधियों ने न्यूयॉर्क में एक मंच पर आकर धर्म के नाम पर फैलाई जाने वाली नफ़रत को अस्वीकार करने का संकल्प लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित 'सार्वभौमिक एकता' (Universal Oneness) सम्मेलन में सभी धर्मगुरुओं ने उत्पीड़ित समुदायों की रक्षा और मानवता की सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया।
शनिवार को हुए इस सम्मेलन के बाद एक घोषणापत्र जारी किया गया, जिसमें कहा गया, "हम नफ़रत, अपमान, अमानवीय व्यवहार या हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल को अस्वीकार करेंगे।" इस दस्तावेज़ में यह भी सिखाने का संकल्प लिया गया कि गहरी आस्था उन लोगों के प्रति सम्मान के साथ सह-अस्तित्व में रह सकती है जो अलग तरह से विश्वास करते हैं।
विभाजन के विरुद्ध साझा आवाज़
घोषणापत्र इस बात को स्वीकार करता है कि जहाँ एक तरफ़ आस्था में लोगों को जोड़ने, प्रेरित करने और जख़्म भरने की असाधारण शक्ति है, वहीं यह भी एक दुखद सच है कि इतिहास में धर्म का इस्तेमाल लोगों को बांटने और हिंसा को जायज़ ठहराने के लिए भी किया गया है। नेताओं ने माना कि आज के दौर में जब सशस्त्र संघर्ष और विस्थापन बढ़ रहा है, तब डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए नफ़रत सीमाओं के पार तेज़ी से फैल रही है।
धार्मिक नेताओं ने कहा कि एकता के लिए एकरूपता ज़रूरी नहीं है और सच्ची आस्था के लिए दूसरों से नफ़रत करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अपने समुदायों के भीतर शांति और जवाबदेही सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। घोषणापत्र में कहा गया, "शांति की शुरुआत अपने ही समुदायों को जवाबदेह ठहराने की हिम्मत से होती है।"
भविष्य की चुनौतियों पर भी ज़ोर
इस बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों से जुड़ी चिंताओं पर भी चर्चा हुई। घोषणापत्र में ज़ोर दिया गया, "हम इस बात पर जोर देंगे कि मानवीय प्रगति हमेशा इंसानों की भलाई के लिए हो और तकनीक से गरिमा, सच्चाई, आजादी और आपसी जुड़ाव कम होने के बजाय मजबूत हों।" इसके अतिरिक्त, गरीबी, भूख, बीमारी और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करने का भी आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में, सभी प्रतिभागियों ने एक-दूसरे को राखी बांधी, जिसे जुड़ाव, देखभाल और आपसी ज़िम्मेदारी का प्रतीक बताया गया। आयोजकों के अनुसार, इस परंपरा का विस्तार परिवारों से आगे बढ़कर समुदायों तक किया जा रहा है।
इनपुट: IANS



