गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारत को आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार, सहयोगियों से भी जीरो टॉलरेंस की उम्मीद: विदेश मंत्री

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को लेकर एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध आत्मरक्षा भारत का अधिकार है और वह अपने सहयोगी देशों से…

भारत को आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार, सहयोगियों से भी जीरो टॉलरेंस की उम्मीद: विदेश मंत्री
(फोटो: IANS)

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को लेकर एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध आत्मरक्षा भारत का अधिकार है और वह अपने सहयोगी देशों से भी इस मुद्दे पर 'कठोर असहिष्णुता' की अपेक्षा रखता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने यह बात मुंबई में अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही।

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यह कार्यक्रम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और राजदूत सर्जियो गोर की उपस्थिति में आयोजित किया गया था। इस दौरान डॉ. जयशंकर ने 26/11 मुंबई हमले के स्मारक पर अमेरिकी विदेश मंत्री द्वारा श्रद्धांजलि दिए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा, "विदेश मंत्री रुबियो, आपका ताज होटल स्थित 26/11 स्मारक पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करना, पूरे मुंबई और समूचे भारत के लिए सराहनीय है।"

आतंकवाद और आपसी सहयोग

विदेश मंत्री ने 26/11 हमले के एक प्रमुख साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यर्पण पर अमेरिकी प्रशासन के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "आतंकवाद के विरुद्ध आत्मरक्षा हमारा अधिकार है, इस पर हमारी नीति सुस्पष्ट है और हम अपने मित्र राष्ट्रों से भी आतंकवाद के प्रति कठोर असहिष्णुता की अपेक्षा रखते हैं।" जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक व्यवस्था एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है और सभी देश अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में साझा हितों का विस्तार ही संबंधों को मजबूत बनाने की कुंजी है।

भारत-अमेरिका साझेदारी का भविष्य

डॉ. जयशंकर ने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यापार, निवेश, तकनीक और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के लिए नए अवसर उपलब्ध हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को मजबूत करने में भी दोनों देशों की साझा हिस्सेदारी है। उन्होंने क्वाड, मिशन 500, पैक्स सिलिका और फोर्ज इनिशिएटिव को उल्लेखनीय उदाहरण बताया। विदेश मंत्री ने कहा, "इतिहास गवाह है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई अमेरिकियों ने समर्थन दिया था। इसके विपरीत भारतीय प्रतिभा और भारतीय कौशल ने अमेरिका में तकनीक के युग को आकार देने में मदद की है।"

इनपुट: IANS

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