एफिल टावर विवाद पर BAPS संत ब्रह्मविहारी स्वामी ने तोड़ी चुप्पी, इसे बताया 'गलतफहमी'
पेरिस के एफिल टावर में एक प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को अलग रखने के आरोपों पर बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के संत ब्रह्मविहारी स्वामी ने अपनी…
पेरिस के एफिल टावर में एक प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान महिला कर्मचारियों को अलग रखने के आरोपों पर बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के संत ब्रह्मविहारी स्वामी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरे विवाद को एक 'गलतफहमी' करार दिया है और कहा है कि वह इसके लिए एफिल टावर प्रबंधन को दोषी नहीं मानते। यह पूरा मामला 5 सितंबर को BAPS प्रतिनिधिमंडल की निजी यात्रा से जुड़ा है, जिसके बाद फ्रांस में लैंगिक समानता को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई थी।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ब्रह्मविहारी स्वामी नई दिल्ली में एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के एक सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि BAPS प्रतिनिधिमंडल ने महिला कर्मचारियों को हटाने की कोई स्पष्ट मांग की थी। उन्होंने कहा, "यह एफिल टावर की तरफ से हुई एक गलतफहमी थी। मैं उन्हें भी इसके लिए दोष नहीं देता।"
विवाद और जांच के नतीजे
यह विवाद तब शुरू हुआ जब खबरें आईं कि BAPS प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी से हटाकर प्रतिनिधिमंडल की नजरों से दूर रखा गया था। इस घटना के विरोध में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया, जिसके कारण एक दिन के लिए एफिल टावर को बंद भी करना पड़ा था। फ्रांस में इस मुद्दे की काफी आलोचना हुई, क्योंकि वहां धर्मनिरपेक्षता और लैंगिक समानता को बहुत महत्व दिया जाता है।
हालांकि, बाद में पेरिस शहर के महानिरीक्षण विभाग द्वारा की गई जांच में ऐसा कोई लिखित प्रमाण नहीं मिला कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल ने महिलाओं को अलग रखने की मांग की हो। फ्रांसीसी अखबार 'ले पेरिसियन' के मुताबिक, जांच में संचार की कमी और सामूहिक स्तर पर हुई गड़बड़ी को इसकी वजह बताया गया।
संतों के धार्मिक अनुशासन पर स्पष्टीकरण
ब्रह्मविहारी स्वामी ने संतों द्वारा पालन किए जाने वाले ब्रह्मचर्य के नियम पर भी स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि यह एक व्यक्तिगत आध्यात्मिक संकल्प है, जिसका अर्थ महिलाओं का विरोध करना या उनके साथ भेदभाव करना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, "हम संत अपने आध्यात्मिक नियमों का पालन करते हैं, लेकिन उन्हें किसी और पर लागू नहीं करते।" उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी महिला की जान खतरे में हो, तो संतों को अपने सभी व्यक्तिगत नियम तोड़कर सबसे पहले उसकी मदद करनी चाहिए।
स्वामी जी ने यह भी बताया कि एफिल टावर प्रबंधन ने उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया था और यह यात्रा आम लोगों के लिए खुलने के समय में ही की गई थी, ताकि पर्यटकों को कोई असुविधा न हो।
इनपुट: IANS



