मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल: 280 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 64 करोड़ की संपत्ति फ्रीज

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल में 280 करोड़ रुपए से अधिक के एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में व्यापक कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला कोहिनूर पावर प्राइवेट…

पश्चिम बंगाल: 280 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 64 करोड़ की संपत्ति फ्रीज
(फोटो: IANS)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल में 280 करोड़ रुपए से अधिक के एक बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में व्यापक कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी और उससे जुड़े लोगों से संबंधित है, जिनके खिलाफ कोलकाता और आसपास के इलाकों में 12 ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस ऑपरेशन में एजेंसी ने करीब 64 करोड़ रुपए की बैंक जमा और वित्तीय संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है।

विज्ञापन

यह पूरी कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई। ईडी ने अपनी जांच की शुरुआत सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) द्वारा कोलकाता की एक विशेष अदालत में दायर शिकायत के आधार पर की थी। कंपनी के खिलाफ जांच के आदेश कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) ने तब दिए थे, जब भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) ने संदिग्ध लेनदेन वाली कंपनियों की सूची मंत्रालय को सौंपी थी।

कैसे हुआ 280 करोड़ का घोटाला?

ईडी की जांच में यह बात सामने आई है कि कंपनी और उसके निदेशकों ने बैंकों के एक समूह से वित्तीय सुविधाएं हासिल करने के लिए कथित तौर पर कई गलत तरीके अपनाए। उन पर आरोप है कि उन्होंने गलत जानकारी दी, जरूरी तथ्यों को छुपाया, खातों में हेरफेर की और कर्ज की रकम को दूसरी जगहों पर लगाया।

बाद में जब यह कंपनी दिवाला प्रक्रिया में चली गई, तो बैंकों को अपनी रकम का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही वापस मिल पाया। जांच एजेंसी के अनुसार, बैंकों को लगभग 7 करोड़ रुपए की ही वसूली हो सकी, जिससे उन्हें अपने मूलधन का करीब 97.5 प्रतिशत का भारी नुकसान उठाना पड़ा।

100 से ज्यादा शेल कंपनियां और विदेशी निवेश

एजेंसी को यह भी पता चला कि कंपनी के प्रमोटर, विजय बोथरा और प्रशांत बोथरा, कथित तौर पर 100 से अधिक शेल (फर्जी) कंपनियों का एक नेटवर्क चला रहे थे। इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर बैंक धोखाधड़ी से मिले पैसे को ठिकाने लगाने, उसे वैध बनाने और कई परतों में घुमाने के लिए किया जाता था। ईडी के मुताबिक, इस रकम का एक बड़ा हिस्सा रिश्तेदारों और डमी निदेशकों के नाम पर विदेशों में भी निवेश किया गया था।

छापेमारी में क्या-क्या मिला?

छापेमारी के दौरान ईडी ने 150 से ज्यादा शेल कंपनियों और व्यक्तियों से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज कर दिया। इसके अलावा, शेयरों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय निवेशों पर भी रोक लगा दी गई है। एजेंसी ने कई डिजिटल सबूत, कंपनी के रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागजात भी जब्त किए हैं। जांच में कोलकाता और आसपास के इलाकों में कई अचल संपत्तियों का भी पता चला है, जिन्हें अपराध की आय से खरीदा गया था। इन संपत्तियों से प्रमोटरों को हर महीने करीब 26 लाख रुपए किराये के रूप में मिलते थे। ईडी अब जब्त दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है ताकि घोटाले के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

इनपुट: IANS

N

News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से पश्चिम बंगाल से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →