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ED अधिकारियों पर हमला: CPI(M) कार्यकर्ताओं ने जमानत के लिए केरल हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों पर मई में हुए एक कथित हमले के मामले में आरोपी सात CPI(M) कार्यकर्ताओं ने जमानत के लिए केरल हाईकोर्ट का रुख किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये…

ED अधिकारियों पर हमला: CPI(M) कार्यकर्ताओं ने जमानत के लिए केरल हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया
(फोटो: IANS)

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों पर मई में हुए एक कथित हमले के मामले में आरोपी सात CPI(M) कार्यकर्ताओं ने जमानत के लिए केरल हाईकोर्ट का रुख किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये कार्यकर्ता दो महीने से अधिक समय से जेल में बंद हैं और निचली अदालत से उनकी जमानत याचिकाएं दो बार खारिज हो चुकी हैं।

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यह मामला मई के अंतिम सप्ताह की एक घटना से जुड़ा है, जब ED के अधिकारी मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीणा की बंद हो चुकी आईटी कंपनी से जुड़े एक मामले की जांच के सिलसिले में विपक्ष के नेता के किराए के आवास पर तलाशी लेने पहुंचे थे। तलाशी के बाद जब अधिकारी लौट रहे थे, तो कथित तौर पर CPI(M) समर्थकों की भीड़ ने उनके काफिले पर हमला कर दिया, जिससे कुछ कर्मचारी घायल हो गए और गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा।

कानूनी लड़ाई तेज

इस मामले को लेकर केंद्रीय एजेंसी और आरोपियों के बीच एक बड़ी कानूनी लड़ाई देखने को मिल रही है। 30 जुलाई से 4 अगस्त के बीच इन जमानत याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। ED ने इन याचिकाओं का विरोध करने के लिए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल को नियुक्त करने का फैसला किया है। वहीं, बचाव पक्ष ने भी वरिष्ठ आपराधिक वकीलों की एक मजबूत टीम तैयार की है।

हाईकोर्ट पहुंचने वालों में पांचवें आरोपी श्रीजीत, सातवें आरोपी अनिल कुमार, शफीक, किरण और निषाद जीवन के अलावा दो अन्य शामिल हैं। कुल मिलाकर, इस मामले में सीपीआई(एम) के 24 कार्यकर्ता 60 दिनों से ज्यादा समय से न्यायिक हिरासत में हैं।

आरोपियों की दलीलें

आरोपियों ने अपनी याचिका में दलील दी है कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाया गया है और कई की पहचान सिर्फ मीडिया रिपोर्टों के आधार पर की गई है। उनका यह भी तर्क है कि हत्या के प्रयास का आरोप टिक नहीं सकता, क्योंकि घटना में न तो किसी हथियार का इस्तेमाल हुआ और न ही किसी को गंभीर चोटें आईं। उन्होंने कहा कि ED के ड्राइवर को केवल मामूली चोटें आई थीं और कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड भी नहीं कराई गई। उनका दावा है कि यह आरोप मामले को गंभीर दिखाने के लिए लगाया गया है।

दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष द्वारा आंशिक चार्जशीट तैयार किए जाने की खबरें हैं। माना जा रहा है कि इस कदम का उद्देश्य आरोपियों को कानूनी जमानत (स्टैच्यूटरी बेल) का दावा करने से रोकना है। हाल ही में, ED ने इस अभियान के दौरान इस्तेमाल की गई किराए की क्षतिग्रस्त गाड़ियों की मरम्मत के लिए 1.75 लाख रुपये का भुगतान किया था।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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