राजस्थान: सूखे पर अशोक गहलोत ने सरकार को घेरा, कहा- 'खोखले वादों' की जगह तुरंत राहत कार्य शुरू करें
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार से पश्चिमी राजस्थान में सूखे की गंभीर स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने सरकार पर 'खोखले वादे' करने का आरोप…
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार से पश्चिमी राजस्थान में सूखे की गंभीर स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने सरकार पर 'खोखले वादे' करने का आरोप लगाते हुए मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित किया जाए और राहत कार्य बिना किसी देरी के शुरू किए जाएँ।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को गहलोत ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में पशु भूख और प्यास से तड़प रहे हैं, जबकि राज्य सरकार केवल घोषणाएं करने में व्यस्त है। उन्होंने चिंता जताई कि अखबारों में सूखे की खबरें आने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी उपाय नहीं किए गए हैं।
घोषणा और हकीकत में अंतर
गहलोत ने मुख्यमंत्री की 30 सितंबर की उस घोषणा का जिक्र किया, जिसमें बाड़मेर में चारे के डिपो खोलने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि आठ दिन बीत जाने पर भी बाड़मेर और जैसलमेर के प्रभावित इलाकों में न तो चारे के डिपो खुले हैं और न ही पशु शिविर शुरू हुए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक, गदरा रोड के स्थानीय प्रशासन ने मीडिया को बताया कि 23 पटवार सर्किलों में चारा शिविर शुरू करने के प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन उन्हें अब तक मंजूरी नहीं मिली है। प्रशासन इस देरी के लिए 'आदर्श आचार संहिता' को वजह बता रहा है।
प्रशासन की तैयारियों पर सवाल
इस पर सवाल उठाते हुए गहलोत ने पूछा कि जब सूखे के हालात पहले से ही स्पष्ट थे, तो आचार संहिता लागू होने से पहले आवश्यक तैयारियां क्यों नहीं की गईं? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राहत कार्य शुरू करने के लिए राज्य चुनाव आयोग से अनुमति ली गई थी। उन्होंने बताया कि जैसलमेर के भाजपा विधायक ने भी सरकार से तुरंत सूखा घोषित करने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।
बिगड़ते हालात और पशुओं की मौत
सूखे की भयावहता का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि बाड़मेर के गदरा रोड इलाके के 20 से ज़्यादा गांवों में मवेशियों की मौत की खबरें हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ इलाकों में मवेशी प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर हैं। सीमावर्ती इलाकों में चारे की कीमतें तीन गुना तक बढ़ गई हैं और जमाखोरी की शिकायतें भी मिल रही हैं।
गौशालाओं की स्थिति पर उन्होंने कहा कि सरकार बड़े जानवरों के लिए प्रतिदिन केवल 50 रुपये दे रही है, जबकि संचालकों के अनुसार वास्तविक खर्च 100 से 150 रुपये है। उन्होंने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 9 सितंबर तक लगभग 383 करोड़ रुपये के अनुदान बिल लंबित थे।
इनपुट: IANS



