नशा तस्करी पर बड़ा एक्शन: त्रिपुरा-बंगाल में पाउडर के नीचे छिपाकर रखी 1.11 लाख कफ सिरप की बोतलें जब्त
नशीली दवाओं के तस्करों ने तस्करी का एक नया तरीका निकाला, लेकिन राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने उनकी कोशिश नाकाम कर दी। पूर्वी भारत में दो बड़े ऑपरेशनों के दौरान, DRI ने त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल से कोड
नशीली दवाओं के तस्करों ने तस्करी का एक नया तरीका निकाला, लेकिन राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने उनकी कोशिश नाकाम कर दी। पूर्वी भारत में दो बड़े ऑपरेशनों के दौरान, DRI ने त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल से कोडीन-आधारित कफ सिरप की 1.11 लाख से ज़्यादा बोतलें जब्त की हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई में एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया गया है।
इन बोतलों को बड़ी चालाकी से पाउडर जैसी सामग्री की परतों के नीचे छिपाया गया था, ताकि किसी को शक न हो। ये ऑपरेशन दिखाते हैं कि संगठित आपराधिक समूह किस तरह लगातार फार्मास्युटिकल दवाओं को नशे के कारोबार में धकेलने की कोशिश कर रहे हैं।
त्रिपुरा में ट्रेन से पकड़ी गई खेप
पहला ऑपरेशन 2 जुलाई को त्रिपुरा में चलाया गया। DRI अधिकारियों ने असम राइफल्स और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की मदद से अगरतला जा रही एक ट्रेन की पार्सल वैन को रोका। जांच करने पर धातु के 80 ड्रमों के अंदर छिपाकर रखी गई कोडीन-आधारित कफ सिरप की 55,626 बोतलें मिलीं। इन्हें पाउडर की परत के नीचे छुपाया गया था। इस खेप की डिलीवरी लेने आए एक शख्स को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
पश्चिम बंगाल के गोदाम में छापा
इसी तरह की एक अन्य कार्रवाई पश्चिम बंगाल के डंकुनी में हुई। यहां DRI की टीम ने एक गोदाम पर छापा मारा। गोदाम में रखे 104 सीलबंद लोहे के ड्रमों की तलाशी ली गई, जिसमें से कफ सिरप की 56,225 बोतलें बरामद हुईं। तस्करों ने यहां भी वही तरीका अपनाया था और बोतलों को चाइना क्ले पाउडर के नीचे छिपा दिया था।
दोनों ही मामलों में जब्त की गई पूरी खेप को NDPS एक्ट, 1985 के तहत सीज़ कर लिया गया है। गौरतलब है कि कोडीन अफीम से बनने वाला एक पदार्थ है, जिसका इस्तेमाल दवाइयों में नियंत्रित रूप से होता है। लेकिन, नशे के लिए इसका दुरुपयोग होने की आशंका के कारण यह अक्सर तस्करों के निशाने पर रहता है।
इनपुट: IANS



