महाराष्ट्र में सूखे का साया: ठाकरे गुट ने 'डबल इंजन' सरकार को घेरा, 90% हिस्से पर संकट की आशंका
महाराष्ट्र में मानसून की बेरुखी से राज्य का एक बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में आता दिख रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस स्थिति को लेकर…
महाराष्ट्र में मानसून की बेरुखी से राज्य का एक बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में आता दिख रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य की 'डबल इंजन' सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक संपादकीय में चेतावनी दी गई है कि अगर मौसम का यही रुख रहा तो अगले दो महीनों में महाराष्ट्र के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से में भीषण सूखा पड़ सकता है।
संपादकीय में दावा किया गया है कि राज्य के 36 में से 31 जिलों में बारिश नहीं हुई है, जिससे खेत सूख रहे हैं और खड़ी फसलें झुलस रही हैं। कई इलाकों में 30 से 45 दिनों का लंबा सूखा खिंच चुका है, जिससे किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। वैश्विक स्तर पर अल नीनो प्रभाव के कारण देश भर के 350 से अधिक जिलों में इसी तरह के हालात बन रहे हैं, जिससे अनाज और पीने के पानी की भारी कमी की आशंका भी जताई गई है।
मानसून का अनियमित चक्र और फसलों पर असर
इस साल मानसून ने लगभग 15 दिन की देरी से दस्तक दी। जून में कम बारिश के बाद जुलाई में भारी वर्षा हुई, लेकिन इससे बुवाई में ही एक महीने की देरी हो गई। जुलाई की बारिश ने फसलों को कुछ समय के लिए राहत दी, लेकिन जैसे ही फसलें फूलने और फलियां लगने (पुष्पन चरण) की महत्वपूर्ण अवस्था में पहुंचीं, बारिश गायब हो गई। सामना के संपादकीय के मुताबिक, अगस्त के पहले सप्ताह से ही पूरे राज्य में बारिश थम गई है।
किसानों ने कुओं में जमा पानी से सिंचाई की कोशिश की, लेकिन अब वे स्रोत भी सूख चुके हैं। नतीजतन, लाखों हेक्टेयर में लगी सोयाबीन, कपास, मक्का और हल्दी जैसी नकदी फसलें सूख गई हैं, जबकि उड़द और मूंग जैसी दालें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
किसानों की बढ़ती चिंता और भविष्य का संकट
सबसे ज्यादा मार उन किसानों पर पड़ी है जिनके पास सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है। विदर्भ में 50 लाख हेक्टेयर और मराठवाड़ा में 48 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर इस मौसम में बुवाई हुई थी। अब फसलें मुरझाते देख कई किसान रबी मौसम की तैयारी के लिए अपनी खड़ी फसलों पर ही हल चलाने को मजबूर हो गए हैं।
चिंता सिर्फ खरीफ फसल तक ही सीमित नहीं है। सितंबर में भी बारिश न होने से गेहूं और चना जैसी सर्दियों की फसलों की बुवाई पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा, पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहरा गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने सरकार से तत्काल जल प्रबंधन योजनाएं बनाने और सूखा-पूर्व राहत उपाय शुरू करने का आग्रह किया है।
इनपुट: IANS



