तमिलनाडु: मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की तबीयत बिगड़ी, DMK का वार्षिक 'मुप्पेरुम विझा' कार्यक्रम स्थगित
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के अचानक बीमार पड़ने के कारण पार्टी का प्रतिष्ठित वार्षिक कार्यक्रम 'मुप्पेरुम विझा' स्थगित कर दिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के अचानक बीमार पड़ने के कारण पार्टी का प्रतिष्ठित वार्षिक कार्यक्रम 'मुप्पेरुम विझा' स्थगित कर दिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्यक्रम मंगलवार शाम को चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय अन्ना अरिवलयम के कलैगनार अरंगम में होना था।
पार्टी के महासचिव दुरईमुरुगन ने कार्यक्रम को टालने की घोषणा करते हुए बताया कि नई तारीख की जानकारी बाद में दी जाएगी। इससे पहले, मंगलवार को ही DMK संस्थापक सी.एन. अन्नादुरई की जयंती के अवसर पर आयोजित एक अन्य कार्यक्रम से भी स्टालिन की अनुपस्थिति ने पार्टी पदाधिकारियों के बीच चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, पार्टी ने उनकी बीमारी के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं दी है।
क्या है 'मुप्पेरुम विझा' कार्यक्रम?
DMK के राजनीतिक कैलेंडर में 'मुप्पेरुम विझा' यानी 'तीन उत्सवों का पर्व' सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजनों में से एक है। यह तीन बड़े अवसरों को एक साथ मनाने के लिए आयोजित किया जाता है:
- समाज सुधारक ई.वी. रामासामी 'थंथई पेरियार' की जयंती (17 सितंबर)
- तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई 'पेरारिग्नार अन्ना' की जयंती (15 सितंबर)
- DMK पार्टी की स्थापना का दिन (17 सितंबर)
इस कार्यक्रम में पारंपरिक रूप से पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं, प्रतिष्ठित हस्तियों और द्रविड़ आंदोलन में योगदान देने वालों को सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष भी पेरियार, अन्ना, कलैगनार, पावेंधर और एम.के. स्टालिन के नाम पर पुरस्कार दिए जाने थे।
द्रविड़ आंदोलन के दो स्तंभ
पेरियार (जन्म 17 सितंबर, 1879): इरोड में जन्मे पेरियार ने आत्म-सम्मान आंदोलन का नेतृत्व किया और जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता तथा अंधविश्वास के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया। उनके तर्कवादी विचारों ने द्रविड़ आंदोलन की वैचारिक नींव रखी।
अन्नादुरई (जन्म 15 सितंबर, 1909): कांचीपुरम में जन्मे अन्नादुरई एक प्रखर वक्ता और लेखक थे। उन्होंने 1949 में पेरियार के द्रविड़ कड़गम से अलग होकर DMK की स्थापना की। 1967 में वे मुख्यमंत्री बने और मद्रास राज्य का नाम बदलकर तमिलनाडु करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
इनपुट: IANS



