गुरूवार, 2 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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तमिलनाडु कैबिनेट की गोपनीय बैठकों में बाहरी लोगों का प्रवेश? DMK ने CM के करीबियों पर FIR की मांग की

तमिलनाडु की सियासत में एक गंभीर आरोप ने हलचल मचा दी है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के दो करीबी सहयोगियों पर कैबिनेट जैसी अति-गोपनीय बैठको

तमिलनाडु कैबिनेट की गोपनीय बैठकों में बाहरी लोगों का प्रवेश? DMK ने CM के करीबियों पर FIR की मांग की
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु की सियासत में एक गंभीर आरोप ने हलचल मचा दी है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के दो करीबी सहयोगियों पर कैबिनेट जैसी अति-गोपनीय बैठकों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने इस मामले में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) से तत्काल FIR दर्ज कर जांच शुरू करने का आग्रह किया है।

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डीएमके के संगठन सचिव आर.एस. भारती द्वारा डीजीपी को सौंपी गई शिकायत में दो निजी व्यक्तियों—जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी—का नाम लिया गया है। आरोप है कि ये दोनों व्यक्ति सरकार में कोई भी आधिकारिक पद न होने के बावजूद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट बैठकों, आधिकारिक समीक्षा बैठकों और अन्य उच्च-स्तरीय चर्चाओं में लगातार शामिल होते रहे हैं।

कानूनी और संवैधानिक उल्लंघन का आरोप

डीएमके ने अपनी शिकायत में इसे संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों का गंभीर उल्लंघन बताया है। पार्टी ने मांग की है कि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023, और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 समेत अन्य लागू कानूनों के तहत इन कथित अपराधों की व्यापक जांच की जाए।

शिकायत में तर्क दिया गया है कि मुख्यमंत्री संविधान के अनुच्छेद 164(3) के तहत पद और गोपनीयता की शपथ से बंधे हैं और कैबिनेट की कार्यवाही को गोपनीय रखना उनका कानूनी दायित्व है। आर.एस. भारती ने कहा कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सीधे तौर पर संवैधानिक दायित्वों, वैधानिक कर्तव्यों और आपराधिक कानून का उल्लंघन होगा, जिस पर तत्काल पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता है।

जांच के प्रमुख बिंदु

डीएमके ने पुलिस से आग्रह किया है कि वह इस बात की गहराई से जांच करे कि अरोकियासामी और रेड्डी (जिन्हें आंध्र प्रदेश का निवासी बताया गया है) को राज्य सचिवालय में होने वाली इन संवेदनशील बैठकों में प्रवेश कैसे मिला। पार्टी ने यह भी पता लगाने की मांग की है कि:

  • क्या इन व्यक्तियों के साथ कोई गोपनीय जानकारी साझा की गई थी?
  • क्या सरकारी कर्मचारियों ने नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन कर उनकी भागीदारी को सुगम बनाया?

पार्टी का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला गोपनीय सरकारी सूचनाओं के अवैध आदान-प्रदान और सार्वजनिक पद के संभावित दुरुपयोग का प्रतीत होता है, जिसके लिए आपराधिक जांच अनिवार्य है।

इनपुट: IANS

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