खैबर पख्तूनख्वा: आपातकाल और गिरफ्तारियों पर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने उठाए गंभीर सवाल
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल लागू करने, इंटरनेट बंद करने और मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं को हिरासत में लेने के फैसले पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गहरी…
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल लागू करने, इंटरनेट बंद करने और मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं को हिरासत में लेने के फैसले पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने संघीय सरकार द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों की आवश्यकता और उनके पैमाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पाकिस्तान की संघीय सरकार ने रविवार को प्रांत में गवर्नर शासन लागू करते हुए आपातकाल की घोषणा कर दी थी। इस कदम के बाद, जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित कर दिया गया।
मानवाधिकारों पर चिंता
एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण एशिया के उपनिदेशक बाबू राम पंत ने इन घटनाक्रमों की निंदा की। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री समेत प्रमुख नेताओं की मनमानी हिरासत और पूरे प्रांत में इंटरनेट सेवाओं में बाधा की खबरें इन आपातकालीन उपायों के अनुपात पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल मानवाधिकारों को दबाने, असहमति को कुचलने या सत्ता के केंद्रीकरण के लिए नहीं किया जा सकता। पंत के अनुसार, "कुछ बेहद सीमित परिस्थितियों में, जब कोई सार्वजनिक आपात स्थिति देश के अस्तित्व के लिए खतरा बन जाती है, तब सरकारें अपने मानवाधिकार संबंधी दायित्वों से अस्थायी रूप से हटने के उपाय कर सकती हैं। हालांकि, आपातकालीन शक्तियां मानवाधिकारों के दमन, असहमति की आवाज दबाने या सत्ता को केंद्रित करने का खुला अधिकार नहीं देतीं।"
सेना की तैनाती पर चेतावनी
प्रांत में सशस्त्र बलों की तैनाती पर चिंता जताते हुए पंत ने चेतावनी दी कि इससे खैबर पख्तूनख्वा का और अधिक सैन्यीकरण हो सकता है तथा बल के गैरकानूनी इस्तेमाल का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि सैन्य बलों का उपयोग सामान्य कानून-व्यवस्था के लिए न हो और वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के प्रति जवाबदेह बने रहें।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार निलंबित होने के बाद सोमवार को खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने कहा है कि इन नेताओं के खिलाफ लंबित कानूनी मामलों में आरोप तय कर मुकदमा चलाया जाएगा।
बिगड़ते हालात और विरोध
आपातकाल लागू होने के बाद प्रांत में तनाव बढ़ गया है। गवर्नर हाउस में आगजनी की घटना सामने आई, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए। वहीं, विभिन्न शहरों में पुलिस द्वारा गोलीबारी और आंसू गैस के गोले दागने की भी खबरें हैं। विपक्षी दलों ने संघीय सरकार के इस फैसले को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है और इसे कानूनी तौर पर चुनौती देने की बात कही है।
इनपुट: IANS



