रविवार, 16 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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महाराष्ट्र: ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने फैसले पर उठाए सवाल

महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने के महायुति सरकार के फैसले पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। केंद्र सरकार में मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया-ए…

महाराष्ट्र: ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य, केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने फैसले पर उठाए सवाल
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने के महायुति सरकार के फैसले पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। केंद्र सरकार में मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया-ए (RPI-A) के प्रमुख रामदास आठवले ने इस नियम का विरोध करते हुए कहा है कि अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले लोगों के बीच विवाद पैदा करना सही नहीं है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आठवले ने मुंबई को भारत की आर्थिक राजधानी बताते हुए कहा कि देश के हर हिस्से से लोग यहाँ रोज़गार की तलाश में आते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "मुंबई में बड़े उद्योगों के साथ-साथ फिल्म इंडस्ट्री भी है और देशभर के लोग यहां काम करने आते हैं। ऐसे में हिंदी और मराठी को लेकर विवाद पैदा करना बिल्कुल सही नहीं है।"

क्या है सरकार का नया नियम?

दरअसल, महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को ऐलान किया था कि अगर राज्य के ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान नहीं है, तो उनका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत महाराष्ट्र मोटर वाहन (संशोधन) नियम, 2026 को लागू करने का आदेश जारी कर दिया है।

इसके तहत, मराठी न जानने वाले ड्राइवरों को पहले एक महीने का नोटिस दिया जाएगा। यदि वे इस अवधि में भाषा नहीं सीखते, तो उनका लाइसेंस तीन महीने के लिए निलंबित हो सकता है। इसके बाद भी नियम का पालन न करने पर लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है। परिवहन मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि 1989 के एक पुराने नियम का ही सख्ती से पालन कराया जा रहा है।

आठवले ने क्या सुझाव दिया?

हालांकि रामदास आठवले इस बात से सहमत हैं कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी सीखनी चाहिए, लेकिन उन्होंने कहा कि भाषा न जानने पर तत्काल कार्रवाई करना अनुचित है। उन्होंने ड्राइवरों को "और समय" देने की वकालत की।

आठवले ने ऑटो चालकों को एक सामान्य कामकाजी श्रमिक बताते हुए कहा, "वह ऑटो चलाकर करीब 20 हजार रुपये महीने कमाता है।" उन्होंने इस बात का भी ज़िक्र किया कि मंत्री सरनाईक ने ड्राइवरों के लिए मराठी सिखाने की कक्षाएं उपलब्ध कराने की बात कही है। आठवले ने दावा किया कि राज्य में लगभग 80 प्रतिशत गैर-मराठी लोग पहले से ही मराठी बोल और समझ सकते हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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