GDP ग्रोथ 7.8% पर कांग्रेस का सवाल: अर्थव्यवस्था की 'बेहद विकृत तस्वीर' बताया
कांग्रेस पार्टी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इन आंकड़ों को अर्थव्यवस्था की 'अत्यंत विकृत तस्वीर' करार देते हुए इसे…
कांग्रेस पार्टी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इन आंकड़ों को अर्थव्यवस्था की 'अत्यंत विकृत तस्वीर' करार देते हुए इसे 'समय से पहले की खुशी' बताया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कांग्रेस के संचार मामलों के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि जिस तरह से तिमाही जीडीपी के आंकड़े पेश किए गए हैं, वे देश में निजी निवेश की कमजोर भावना को नहीं दर्शाते, चाहे वह घरेलू हो या विदेशी। उन्होंने यह भी दावा किया कि अप्रैल-जून तिमाही के ये आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक के 7 प्रतिशत के अनुमान से अधिक हैं, लेकिन यह वृद्धि वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया संकट, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी चुनौतियों के बीच आई है।
अर्थव्यवस्था पर कांग्रेस के मुख्य आरोप
राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कई बिंदुओं पर सरकार को घेरते हुए अर्थव्यवस्था की एक निराशाजनक तस्वीर पेश की। उन्होंने दावा किया कि उपभोक्ता विश्वास 'बेहद सुस्त' है और यह कोविड महामारी के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर है, जिसमें नवंबर 2025 से लगातार गिरावट आ रही है।
उन्होंने कहा कि घरेलू आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और भारत के शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी 'चिंताजनक स्तर' पर है। रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि चीन के साथ लगातार बढ़ता व्यापार घाटा अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि "प्रधानमंत्री द्वारा जानबूझकर प्रोत्साहित किए गए कुछ बड़े समूहों द्वारा प्रमुख क्षेत्रों पर कब्जा करना हानिकारक प्रभाव डाल रहा है।"
घरेलू बचत और वेतन पर चिंता
अपनी पोस्ट में जयराम रमेश ने यह भी दावा किया कि देश में घरेलू बचत दरें घटी हैं, जबकि कर्ज रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ भारत के पांच सबसे धनी परिवारों की संपत्ति में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, तो वहीं दूसरी ओर वेतनभोगी कर्मचारियों के वास्तविक वेतन में गिरावट आई है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री द्वारा समय से पहले मनाया जाने वाला जश्न करार दिया।
इनपुट: IANS



