पंजाब: हड़ताली कर्मचारियों को नोटिस पर कांग्रेस की चेतावनी, CM भगवंत मान के खिलाफ़ यूनियन ने खोला मोर्चा
पंजाब में महंगाई भत्ता (DA) जारी करने की मांग को लेकर हड़ताल पर गए करीब तीन लाख सरकारी कर्मचारियों को आम आदमी पार्टी की सरकार ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस…
पंजाब में महंगाई भत्ता (DA) जारी करने की मांग को लेकर हड़ताल पर गए करीब तीन लाख सरकारी कर्मचारियों को आम आदमी पार्टी की सरकार ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस कार्रवाई के बाद राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को चेतावनी दी है कि वे कर्मचारियों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कदम न उठाएँ।
वडिंग ने मुख्यमंत्री मान को आगाह करते हुए कहा कि अगर उन्होंने कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की कोशिश की तो यह उनके मुख्यमंत्री के रूप में "आखिरी दिन साबित हो सकता है"। उन्होंने शनिवार को मीडिया से कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर्मचारियों का लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार उन्हें धमकियों से डरा नहीं सकती। वडिंग ने जोर देकर कहा कि किसी भी कार्रवाई के ऐसे दूरगामी परिणाम होंगे जिनकी मुख्यमंत्री ने कल्पना भी नहीं की होगी।
कर्मचारी यूनियन ने राज्यपाल से की शिकायत
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब कर्मचारी संगठन 'सांझा मुलाजम मंच' ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से संपर्क किया। यूनियन ने 27 अगस्त को हड़ताल के दिन मुख्यमंत्री द्वारा उनके साथ प्रस्तावित बैठक में शामिल न होने पर कार्रवाई की मांग की है। कर्मचारियों ने यह भी मांग रखी है कि इस लापरवाही के लिए मुख्यमंत्री मान के एक दिन के वेतन में कटौती की जाए। राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में यूनियन ने सीएम पर "सरकारी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाही, प्रशासनिक मनमानी और सार्वजनिक धन की बर्बादी" जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
बीते 27 अगस्त को पंजाब भर में लगभग तीन लाख सरकारी कर्मचारी महंगाई भत्ते की मांग को लेकर एक दिन की सामूहिक आकस्मिक छुट्टी पर चले गए थे, जिससे सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ था। लगभग चार लाख पेंशनभोगियों ने भी इस हड़ताल का समर्थन किया। इस हड़ताल का असर सरकारी अस्पतालों, डिस्पेंसरी और शिक्षण संस्थानों में भी देखने को मिला। कर्मचारी संघों का दावा है कि सरकार पर उनका 20,161 करोड़ रुपये का महंगाई भत्ता बकाया है। कर्मचारियों को वर्तमान में मूल वेतन का 42 प्रतिशत डीए मिल रहा है, जबकि उनका कहना है कि यह 58 प्रतिशत होना चाहिए।
इनपुट: IANS



